महराजगंज: ठूठीबारी क्षेत्र के 10 गांवों में रोपे गए 200 पौधे; SSB, पुलिस और ‘सेवा’ संस्थान ने मिलकर दिया हरित क्रांति का संदेश

ठूठीबारी 

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज महराजगंज जनपद के भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र ठूठीबारी में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा अभियान चलाया गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज महराजगंज जनपद के भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र ठूठीबारी में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा अभियान चलाया गया। मानव सेवा संस्थान ‘सेवा’ द्वारा क्लस्टर हेड वरुण मिश्रा के नेतृत्व में क्षेत्र के 10 अलग-अलग गांवों में सघन वृक्षारोपण एवं जन-जागरूकता अभियान का आयोजन हुआ। इस दौरान एसएसबी के जवानों, स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर कुल 200 फलदार, छायादार और औषधीय पौधे रोपे और प्रकृति को बचाने का सामूहिक संकल्प लिया।

क्रासर: एसएसबी, पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश; शीशम, आंवला और जामुन सहित कई प्रजातियों के पौधे रोपे

वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता — इंस्पेक्टर सुमित सिंह

प्राप्त विवरण के अनुसार, इस वृहद पर्यावरण अभियान में मुख्य अतिथि के रूप में 22वीं वाहिनी एसएसबी (SSB) बटालियन महराजगंज कैंप ठूठीबारी के इंस्पेक्टर जीडी सुमित कुमार सिंह तथा लक्ष्मीपुर चौकी प्रभारी/उपनिरीक्षक मनीष कुमार तिवारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

 

बढ़ते वैश्विक तापमान और पर्यावरण असंतुलन की चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण आज के समय की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। पेड़-पौधे ही हमारी धरती और जीवन के असली रक्षक हैं। केवल पौधा लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाकर उसके बड़े होने तक उसकी नियमित देखभाल और सिंचाई की जिम्मेदारी भी उठानी होगी।

10 गांवों में रोपे गए विभिन्न प्रजातियों के 200 पौधे

संस्थान के क्लस्टर हेड वरुण मिश्रा की देखरेख में चले इस अभियान के तहत सीमावर्ती क्षेत्र के 10 गांवों को कवर किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान प्रकृति और मिट्टी की अनुकूलता को देखते हुए विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिनमें मुख्य रूप से:

लकड़ी व छायादार: शीशम, सागौन, बकैन और अर्जुन।

फलदार व औषधीय: आंवला, अमरूद, लीची, जामुन, हरसिंगार और तूत (शहतूत)

आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में एसएसबी व पुलिस के जवानों सहित सभी प्रतिभागियों ने हाथ आगे बढ़ाकर पर्यावरण को सुरक्षित रखने की सामूहिक शपथ ली। ग्रामीणों ने कहा कि वृक्ष इस पृथ्वी का वास्तविक जीवन आधार हैं और इनके संरक्षण से ही हमारी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा। मानव सेवा संस्थान ‘सेवा’ के पदाधिकारियों ने आश्वस्त किया कि जनहित और पर्यावरण चेतना से जुड़े ऐसे सामाजिक अभियान भविष्य में भी सीमावर्ती अंचलों में निरंतर जारी रहेंगे।

 

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