धौलाना/हापुड़
हापुड़ जनपद के धौलाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिपलेड़ा में प्रशासन और बैंक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

हापुड़ जनपद के धौलाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिपलेड़ा में प्रशासन और बैंक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एक निजी बैंक का करीब 35.30 लाख रुपये का भारी-भरकम लोन निर्धारित समयावधि में जमा न करने पर प्रशासन ने वित्तीय आस्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन अधिनियम के तहत एक आवासीय संपत्ति को पूरी तरह से सील कर दिया है। इस बड़ी कुर्की कार्रवाई से पूरे इलाके के डिफॉल्टरों में हड़कंप मच गया है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर नायब तहसीलदार की अगुवाई में हुई कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हापुड़ की जिलाधिकारी कविता मीणा के कड़े रुख और निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने गुरुवार को यह सख्त कदम उठाया। धौलाना की नायब तहसीलदार दिव्यांशी सिंह के नेतृत्व में गठित की गई विशेष राजस्व टीम पिपलेड़ा गांव पहुंची।
इस संयुक्त टीम में निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी, यूपीएसआईडीसी के इंचार्ज वरुण कुमार और हल्का लेखपाल टिंकू राम मुख्य रूप से शामिल रहे। टीम ने विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए उक्त आवासीय संपत्ति के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और बैंक का आधिकारिक कब्जा नोटिस (Possession Notice) चस्पा कर दिया।
2025 में जारी हुआ था डिमांड नोटिस, समय सीमा बीतने पर जब्त हुई संपत्ति
राजस्व और बैंक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, एक स्थानीय कंपनी और उसके गारंटरों ने निजी बैंक से व्यावसायिक ऋण लिया था। 7 अप्रैल 2025 तक इस खाते पर कुल 35 लाख 30 हजार 759 रुपये का कर्ज बकाया हो चुका था, जिसे चुकता नहीं किया गया।
इसके बाद बैंक प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाते हुए 9 अप्रैल 2025 को एक औपचारिक डिमांड नोटिस जारी कर ऋणी व गारंटरों को भुगतान का अंतिम अवसर प्रदान किया था। तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब बकायेदार रकम जमा करने में पूरी तरह नाकाम रहे, तो बैंक ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
नायब तहसीलदार दिव्यांशी सिंह ने को बताया कि विधिक प्रावधानों के तहत दी गई मोहलत खत्म होने के बाद कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। गुरुवार को प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में बिना किसी व्यवधान के संपत्ति को सील कर उसका भौतिक कब्जा आधिकारिक रूप से बैंक के सुपुर्द कर दिया गया है। यदि बकायेदार अब भी ऋण राशि का निस्तारण नहीं करते हैं, तो बैंक नियमानुसार इस संपत्ति की नीलामी कर अपनी डूबी रकम की वसूली करेगा।
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