सिद्धार्थनगर: कॉरिडोर सड़क परियोजना के सर्वे पर भड़के ग्रामीण, विस्थापन के खिलाफ DM को सौंपा ज्ञापन; बंद पड़ी नहर की जमीन इस्तेमाल करने की मांग

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर जनपद में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी कॉरिडोर सड़क परियोजना को लेकर धरातल पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। परियोजना के तहत लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जा रहे सर्वे से प्रभावित होने वाले ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी कॉरिडोर सड़क परियोजना को लेकर धरातल पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। परियोजना के तहत लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जा रहे सर्वे से प्रभावित होने वाले ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। बर्डपुर मोड से तिलकपुर,चैनपुर,तेनुहवा धर्मपुर, और अलीगढ़वा मार्ग के किनारे बसे सैकड़ों परिवारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने PWD के वर्तमान सर्वे को भेदभावपूर्ण बताते हुए इस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सर्वे में नियमों की अनदेखी का आरोप, उजाड़ दिए जाएंगे मकान और दुकानें

जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए किए जा रहे सर्वे में तय नियमों को ताक पर रख दिया गया है। नियमों के मुताबिक, सड़क के सेंटर लाइन (मध्य बिंदु) से दोनों ओर बराबर दूरी पर भूमि का अधिग्रहण किया जाना चाहिए।

लेकिन, करीब 6 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर PWD की टीम केवल एक ही तरफ 21 मीटर तक का सर्वे कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इसी सर्वे के आधार पर काम हुआ, तो सड़क किनारे वर्षों से स्थापित बाजार, व्यावसायिक दुकानें और सैकड़ों गरीब परिवारों के मकान पूरी तरह जमींदोज हो जाएंगे।

बंद पड़ी सरकारी नहर की जमीन का हो इस्तेमाल, बचेगा आशियाना

ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने विस्थापन से बचने का एक ठोस और व्यावहारिक विकल्प भी रखा है। उन्होंने बताया कि सड़क के दूसरी ओर सिंचाई विभाग की एक बहुत पुरानी नहर मौजूद है। यह नहर पिछले कई वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ी है और इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है।

ग्रामीणों की मांग है कि यदि सरकार इस अनुपयोगी सरकारी भूमि नहर की जमीन को कॉरिडोर परियोजना में शामिल कर ले, तो घनी आबादी वाले क्षेत्रों के सैकड़ों परिवारों और छोटे व्यापारियों को विस्थापित होने से आसानी से बचाया जा सकता है।

बाईपास न होने से रोजी-रोटी का संकट

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने चिंता जताते हुए कहा कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों और मुख्य बाजारों को टूटने से बचाने के लिए इस परियोजना में किसी ‘बाईपास मार्ग’ का प्रावधान नहीं किया गया है। यदि बाजार ही उजाड़ दिए गए, तो छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के सामने परिवार के भरण-पोषण और रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

हम विकास के विरोधी नहीं, लेकिन हमारा जीवन भी सुरक्षित रहे

“हम देश और जिले के विकास के विरोधी नहीं हैं। हम राष्ट्रीय महत्व की इस कॉरिडोर परियोजना का स्वागत करते हैं, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिससे इंसानों का जीवन और रोजगार सुरक्षित रहे। प्रशासन को पक्षपातपूर्ण सर्वे रोककर निष्पक्षता से काम करना चाहिए ताकि न्यूनतम विस्थापन हो।”

ग्रामीणों ने की संयुक्त टीम गठित करने की मांग

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि वर्तमान में चल रहे एकतरफा सर्वे को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। इसके स्थान पर पीडब्ल्यूडी (PWD), राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग की एक संयुक्त टीम गठित की जाए, जो मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करे। साथ ही, घनी आबादी को बचाने के लिए बाईपास मार्ग के निर्माण की संभावनाओं पर भी तकनीकी विचार किया जाए।

विकास बनाम विस्थापन की यह लड़ाई अब जिला मुख्यालय पहुंच चुकी है। अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों के इस व्यावहारिक सुझाव पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है और क्या विकास की इस रफ्तार के बीच आम जनता के आशियाने और रोजगार को सुरक्षित रखने का कोई बीच का रास्ता निकल पाता है या नहीं।

 

 

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