बुलंदशहर: शहादत के 6 साल बाद भी अधूरा है कर्नल आशुतोष शर्मा का ‘गौरव द्वार’, भाई ने सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द

बुलंदशहर

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा की स्मृति में बनने वाला ‘गौरव द्वार’ छह साल बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल सका है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा की स्मृति में बनने वाला ‘गौरव द्वार’ छह साल बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल सका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा और बुलंदशहर जिला पंचायत बोर्ड से प्रस्ताव पास होने के बावजूद धरातल पर निर्माण कार्य शुरू न होने से शहीद के परिजनों में गहरा असंतोष है। इस प्रशासनिक उदासीनता को लेकर शहीद कर्नल के बड़े भाई पीयूष शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखकर अपना दर्द साझा किया है।

भाई का दर्द: क्या मां अपने जीवनकाल में देख पाएंगी बेटे का सम्मान?

शहीद के बड़े भाई पीयूष शर्मा ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए एक गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, “क्या कर्नल आशुतोष शर्मा की बूढ़ी मां अपने जीवनकाल में बेटे के सम्मान में घोषित इस गौरव द्वार को देख पाएंगी?” उन्होंने आगे बताया कि गौरव द्वार के निर्माण के लिए जगह भी चिह्नित की जा चुकी है और लोक निर्माण विभाग (PWD) की तरफ से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी मिल चुका है। इसके बावजूद जिला पंचायत द्वारा निर्माण कार्य शुरू न कराना समझ से परे है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब शहीदों के सम्मान में किए गए वादों को लेकर प्रशासनिक अमले पर सवाल उठ रहे हैं।

हंदवाड़ा मुठभेड़ में 5 जांबाजों के साथ हुए थे शहीद

कर्नल आशुतोष शर्मा सेना की 21वीं राष्ट्रीय राइफल्स (RR) के कमांडिंग ऑफिसर थे और बुलंदशहर की स्याना तहसील के परवाना गांव के मूल निवासी थे। 2 मई 2020 को कश्मीर घाटी के हंदवाड़ा में एक घर में आतंकियों द्वारा बंधक बनाए गए स्थानीय नागरिकों और मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व किया था। लगभग 18 घंटे चली इस भीषण मुठभेड़ में कर्नल आशुतोष शर्मा समेत सेना के 5 जांबाज शहीद हो गए थे, जबकि भारतीय सेना ने लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर हैदर समेत दो पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर कर दिया था।

एसडीएम ने दिया जल्द निर्माण का आश्वासन

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए हैं। स्याना के उपजिलाधिकारी (SDM) लाल जी विश्वकर्मा ने बताया कि शुक्रवार को शहीद कर्नल के परिजन उनसे कार्यालय में आकर मिले थे। उन्होंने परिजनों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस संबंध में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पत्र लिख दिया गया है। तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर जल्द से जल्द गौरव द्वार का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

 

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