रामपुर: 4 साल जेल और 3 साल फरारी के बाद रामपुर लौटे पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर खान, घर पहुंचते ही भावुक हुआ परिवार

रामपुर

रामपुर जनपद के समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और रामपुर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अजहर खान शनिवार को बिजनौर जिला जेल से रिहा होकर पूरे सात साल बाद अपने गृह जनपद रामपुर पहुंचे। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


रामपुर जनपद के समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और रामपुर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अजहर खान शनिवार को बिजनौर जिला जेल से रिहा होकर पूरे सात साल बाद अपने गृह जनपद रामपुर पहुंचे। करीब चार साल दो महीने जेल की सलाखों के पीछे काटने और उससे पहले लगभग तीन वर्ष तक कानूनी कार्रवाई के चलते फरार रहने के बाद उनकी घर वापसी हुई है।

आवास पर उमड़ा समर्थकों का हुजूम, छलके आंसू

अजहर खान के रामपुर स्थित आवास पर पहुंचते ही उनके स्वागत के लिए समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। जैसे ही उन्होंने घर की दहलीज पर कदम रखा, परिवार के सदस्य उनसे लिपटकर रो पड़े। इस दौरान कई करीबियों की आंखें नम हो गईं। अपनी रिहाई और लंबे संघर्ष पर प्रतिक्रिया देते हुए अजहर खान भावुक हो गए। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “मुझ पर और मेरे सहयोगियों पर इतना जुल्म और अत्याचार किया गया है, जितना शायद अंग्रेजों ने भी देशवासियों पर नहीं किया होगा।”

आजम खान के करीबी हैं अजहर, दर्ज हैं 35 मुकदमे

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में साल 2017 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद रामपुर के वरिष्ठ सपा नेता आजम खान, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और उनके करीबियों पर मुकदमों की बाढ़ आ गई थी। इसी सिलसिले में आजम खान के बेहद वफादार माने जाने वाले पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर खान के खिलाफ भी अलग-अलग मामलों में करीब 35 आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए थे। कानूनी शिकंजे से बचने के लिए वे करीब तीन साल तक भूमिगत (फरार) रहे थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

C&DS घोटाले में हाईकोर्ट से मिली अंतिम जमानत

अजहर खान की जेल से रिहाई का रास्ता तब साफ हुआ, जब हाल ही में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से चर्चित सीएंडडीएस (C&DS) घोटाला मामले में जमानत मिल गई। यह पूरा विवाद वर्ष 2019 का है, जब रामपुर में एक तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे नोडल अधिकारी ने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई थी।

बाद में गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिस जमीन पर सौंदर्यीकरण का कार्य कराया गया, वह नियमानुसार ग्रामीण क्षेत्र में आती थी। इसके अलावा, वह जमीन रेलवे क्रॉसिंग के बेहद नजदीक थी, लेकिन निर्माण के लिए रेलवे विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तक नहीं लिया गया था।

सरकारी धन के बंदरबांट और दुरुपयोग की पुष्टि होने पर तत्कालीन नायब तहसीलदार ने थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस विवेचना के दौरान इस घोटाले में सीएंडडीएस और नगर पालिका के कई तत्कालीन आला अधिकारियों सहित अजहर खान और पालिका कर्मचारी नबी अहमद का नाम शामिल किया गया था। अब इस मामले से जुड़े सभी आरोपियों को अदालत से जमानत मिल चुकी है, जिसके बाद अजहर खान की रिहाई संभव हो सकी।

 

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