इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: स्टे के बावजूद युवक को भेजा जेल, UP सरकार को 5 लाख मुआवजे का आदेश; थाना प्रभारी नपेंगे

सिद्धार्थनगर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिद्धार्थनगर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को एक पीड़ित युवक को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश दिया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिद्धार्थनगर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को एक पीड़ित युवक को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। कोर्ट ने यह कार्रवाई गिरफ्तारी पर रोक स्टे ऑर्डर होने के बावजूद युवक को जबरन जेल भेजे जाने के मामले में की है। हाईकोर्ट ने इसे न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना और मानवाधिकारों का हनन माना है। इसके साथ ही कोर्ट ने इटवा के तत्कालीन थाना प्रभारी संजय कुमार मिश्रा के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।

डबल बेंच ने माना गंभीर मामला

यह सख्त आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनाया। खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम संरक्षण गिरफ्तारी पर रोक का आदेश लागू था, उसके बावजूद किसी नागरिक को गिरफ्तार कर जेल भेज देना बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है।

क्या है पूरा मामला?

मामला सिद्धार्थनगर जनपद के इटवा थाने में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा है, जहां अनिल सोनी नामक युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एससी-एसटी (SC/ST) एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

1 अप्रैल 2026: अनिल सोनी ने एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की, जिस पर अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

4 अप्रैल 2026: याचिका के अनुसार, स्टे ऑर्डर होने के बावजूद इटवा पुलिस ने अनिल सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। परिजनों और वकीलों ने पुलिस को कोर्ट के आदेश की कॉपी दिखाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने एक न सुनी।

29 अप्रैल 2026: कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दाखिल होने और हाईकोर्ट के कड़े हस्तक्षेप के बाद आखिरकार युवक को जिला जेल सिद्धार्थनगर से रिहा किया गया।

पुलिस और सरकारी वकीलों के समन्वय पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

हाईकोर्ट ने पुलिस के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें आदेश की जानकारी न होने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कहा कि जब आदेश पारित हुआ, तब सरकारी अधिवक्ता अदालत में मौजूद थे। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि:

प्रदेश में यह एक चिंताजनक स्थिति बनती जा रही है कि या तो सरकारी अधिवक्ता अदालत के आदेश संबंधित अधिकारियों तक समय से नहीं पहुंचाते, या फिर पुलिस अधिकारी जानबूझकर इन आदेशों की अनदेखी करते हैं। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर को भी आदेश की जानकारी भेजी गई थी, फिर भी युवक को तुरंत रिहा नहीं किया गया।

थाना प्रभारी से वसूली कर सकती है सरकार, 13 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट

अदालत ने थाना प्रभारी संजय कुमार मिश्रा के आचरण को घोर लापरवाही और घोर अनुशासनहीनता माना है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि एक महीने के भीतर पीड़ित अनिल सोनी को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सरकार चाहे तो मुआवजे की यह राशि दोषी थाना प्रभारी की जेब से वसूल सकती है।

हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर को 13 जुलाई 2026 तक इस पूरे आदेश की अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो एसपी सिद्धार्थनगर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।

 

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