सिद्धार्थनगर जिला कारागार ने रचा इतिहास: एक साथ मिले तीन अंतरराष्ट्रीय ISO प्रमाण पत्र, प्रदेश का बढ़ाया मान

सिद्धार्थनगर

जिला कारागार सिद्धार्थनगर ने उत्कृष्ट प्रशासनिक व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण तथा सुरक्षा एवं स्वास्थ्य मानकों के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

जिला कारागार सिद्धार्थनगर ने उत्कृष्ट प्रशासनिक व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण तथा सुरक्षा एवं स्वास्थ्य मानकों के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कारागार को एक साथ तीन अंतरराष्ट्रीय ISO प्रमाण पत्र से नवाजा गया है, जिसने न केवल जनपद बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश कारागार विभाग को गौरवान्वित किया है। यह सफलता कारागार प्रशासन की पारदर्शी कार्यप्रणाली, अनुशासित व्यवस्था, नवाचारों और बंदियों के कल्याण के प्रति समर्पित प्रयासों का प्रतिफल है।

कलेक्ट्रेट सभागार में जेल अधीक्षक को सौंपे गए सर्टिफिकेट

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी. एन. द्वारा जेल अधीक्षक सचिन वर्मा को तीनों अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र सौंपे गए। इस अवसर पर उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिला कारागार की इस उपलब्धि को कारागार प्रशासन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

इन तीन श्रेणियों में मिले अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र

ISO 9001:2015 (गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली): यह प्रमाण पत्र दर्शाता है कि संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रभावी है।

ISO 14001:2015 (पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली): यह इस बात को प्रमाणित करता है कि कारागार परिसर के भीतर पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, हरित विकास (ग्रीनरी) और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए बेहतरीन काम हो रहा है।

ISO 45001:2018 (कार्यस्थल पर स्वास्थ्य एवं सुरक्षा): यह सर्टिफिकेट कर्मचारियों और बंदियों की सुरक्षा तथा उनके स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की उत्कृष्टता को प्रमाणित करता है।

परिसर में स्वच्छता, योग और कौशल विकास पर जोर

जेल अधीक्षक सचिन वर्मा के नेतृत्व में जिला कारागार सिद्धार्थनगर ने पिछले कुछ वर्षों में कई अभिनव पहलें की हैं। कारागार परिसर में स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन, बड़े पैमाने पर पौधरोपण और जल संरक्षण के विशेष अभियान चलाए गए हैं। इसके साथ ही बंदियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, योग, ध्यान, खेलकूद और कौशल विकास कार्यक्रमों को भी प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है।

पुनर्वास और सुधार बनी प्राथमिकता

कारागार प्रशासन ने बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनके पुनर्वास को अपनी प्राथमिकता बनाया है। बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। जेल में मानवीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक परामर्श जैसी सुविधाओं को भी बेहद सुदृढ़ किया गया है।

शिवशरणप्पा जी. एन., जिलाधिकारी ने कहा जिला कारागार सिद्धार्थनगर द्वारा प्राप्त यह उपलब्धि पूरे जनपद के लिए गर्व का विषय है। यह प्रमाण पत्र केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उत्कृष्ट कार्य संस्कृति, अनुशासन, पारदर्शिता और समर्पण का प्रतीक है।

सचिन वर्मा, जेल अधीक्षक ने कहा की यह सफलता कारागार के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सामूहिक मेहनत, प्रतिबद्धता तथा सकारात्मक सोच का परिणाम है। यह सम्मान हमें भविष्य में और बेहतर कार्य करने तथा बंदियों के सुधार के लिए नए अवसर तलाशने की प्रेरणा देगा।

 

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