हमीरपुर : बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरा, मलबे में दबकर 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत, करोड़ों का प्रोजेक्ट हुआ जमींदोज

हमीरपुर

उत्तर प्रदेश के जनपद हमीरपुर से एक बेहद दर्दनाक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां बेतवा नदी पर बन रहा एक बड़ा निर्माणाधीन पुल अचानक भरभराकर गिर गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश के जनपद हमीरपुर से एक बेहद दर्दनाक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां बेतवा नदी पर बन रहा एक बड़ा निर्माणाधीन पुल अचानक भरभराकर गिर गया। इस भीषण हादसे की चपेट में आने से पुल निर्माण कार्य में लगे 6 मजदूरों की मलबे में दबकर मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

रात में आए भीषण आंधी-तूफान से हिला करोड़ों का प्रोजेक्ट

मिली जानकारी के मुताबिक, बीती रात क्षेत्र में अचानक मौसम का मिजाज बदला और बेहद तेज आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश हुई। इस प्राकृतिक आपदा के चलते निर्माणाधीन पुल का एक बड़ा हिस्सा और भारी-भरकम गर्डर पूरी तरह हिल गए और अचानक नीचे आ गिरे। बताया जा रहा है कि यह पूरा प्रोजेक्ट करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा था, जो तेज हवाओं के दबाव को झेल नहीं सका।

नीचे सो रहे थे मजदूर, नींद में ही आई मौत

दिल दहला देने वाली बात यह है कि हादसे का शिकार हुए सभी मृतक मजदूर थे, जो दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद रात को इसी निर्माणाधीन पुल के नीचे और आसपास सो रहे थे। रात के वक्त जब अचानक पुल का भारी मलबा और कंक्रीट का ढांचा नीचे गिरा, तो इन मजदूरों को भागने तक का मौका नहीं मिला और वे नींद की हालत में ही मलबे के नीचे दब गए।

सवालों के घेरे में निर्माण कार्य: आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा?

इस भीषण हादसे ने एक बार फिर विकास कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि महज एक रात की आंधी-तूफान में करोड़ों का सरकारी प्रोजेक्ट इस तरह ताश के पत्तों की तरह ढह गया, जो सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी लापरवाही की ओर इशारा करता है।

निर्माणाधीन और बेहद संवेदनशील ढांचे के ठीक नीचे या आसपास मजदूरों के ठहरने और सोने की व्यवस्था क्यों की गई थी? क्या सुरक्षा ऑडिट में इस खतरे को भांपा नहीं गया था?

इस दर्दनाक हादसे में 6 मासूम मजदूरों की जान जाने के बाद अब जनता और पीड़ित परिवारों के बीच भारी आक्रोश है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इस भ्रष्टाचार और लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा संबंधित ठेकेदार, कार्यदायी संस्था के इंजीनियर या फिर निगरानी करने वाले प्रशासनिक अधिकारी?

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीमों ने स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शवों को मलबे से बाहर निकाला। अधिकारियों का कहना है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

 

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