जयपुर में रक्तदान महादान मित्र मंडल के संस्थापक मोहन सिंह सूर्यवंशी सम्मानित, ‘एक्सक्लूसिव नेशनल अवॉर्ड’ से नवाजा

जयपुर

जयपुर राजस्थान की राजधानी और गुलाबी नगरी के नाम से प्रसिद्ध जयपुर में आयोजित एक भव्य समारोह में समाज सेवा और मानवता की अनूठी मिसाल पेश करने वाले ‘रक्तदान महादान मित्र मंडल’ के संस्थापक एवं अंतरराष्ट्रीय रक्तवीर मोहन सिंह सूर्यवंशी को ‘एक्सक्लूसिव नेशनल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


जयपुर राजस्थान की राजधानी और गुलाबी नगरी के नाम से प्रसिद्ध जयपुर में आयोजित एक भव्य समारोह में समाज सेवा और मानवता की अनूठी मिसाल पेश करने वाले ‘रक्तदान महादान मित्र मंडल’ के संस्थापक एवं अंतरराष्ट्रीय रक्तवीर मोहन सिंह सूर्यवंशी को ‘एक्सक्लूसिव नेशनल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। आगामी 23 मई 2026 को इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस ऑर्गेनाइजेशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया।

यह विशेष सम्मान दिव्यांग रक्तवीर मोहन सिंह सूर्यवंशी को पिछले 12 वर्षों से लगातार रक्तदान के क्षेत्र में चलाए जा रहे उनके देशव्यापी ‘रक्तदान महादान जागरूकता अभियान’ तथा स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया गया है।

दिव्यांगता को मात देकर पेश की अनूठी मिसाल
मोहन सिंह सूर्यवंशी और उनकी धर्मपत्नी दोनों ही एक-एक पैर से दिव्यांग हैं, लेकिन शारीरिक चुनौतियों को दरकिनार कर उन्होंने समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। जहाँ एक आम और स्वस्थ व्यक्ति कभी-कभी जीवन की कठिनाइयों से हार मान लेता है, वहीं मोहन सिंह सूर्यवंशी दिन हो या रात, हर वक्त निस्वार्थ भाव से समाज सेवा और मरीजों की जान बचाने के मिशन में जुटे रहते हैं। इस गरिमामयी समारोह में देश-प्रदेश की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, दिव्यांग खिलाड़ी और नामचीन समाजसेवी भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

“रक्तवीरों और शुभचिंतकों को समर्पित है सम्मान”
सम्मान प्राप्त करने के बाद भावुक होते हुए मोहन सिंह सूर्यवंशी ने कहा

“यह सम्मान मेरा अकेले का नहीं है, बल्कि यह मेरी बड़ी बहन समीक्षा जैन (सीईओ, दिव्यांग रसोई), बड़े भाई जय वशिष्ठ और उन सभी जांबाज रक्तवीरों को समर्पित है, जो मेरी एक कॉल पर बिना सोचे-समझे किसी भी अनजान जरूरतमंद मरीज की जान बचाने के लिए तुरंत अस्पताल पहुंच जाते हैं।”

उन्होंने आगे संदेश देते हुए कहा कि रक्तदान केवल मानव सेवा ही नहीं, बल्कि किसी को नया जीवन देने का सबसे बड़ा और पवित्र माध्यम है। समाज के अधिक से अधिक युवाओं को अपनी सोच बदलते हुए इस महाभियान से जुड़ना चाहिए और नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करना चाहिए।

आज मोहन सिंह सूर्यवंशी का यह जज्बा न केवल दिव्यांग समाज के लिए, बल्कि हर उस नागरिक के लिए एक बड़ी सीख और प्रेरणा है जो समाज में बदलाव लाना चाहता है।

 

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