बुलंदशहर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में लगी भीषण आग, वॉर्डन और पुलिस की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा

अनूपशहर (बुलंदशहर)

बुलंदशहर जनपद के अनूपशहर क्षेत्र से आज सोमवार सुबह एक बेहद सनसनीखेज खबर सामने आई।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद के अनूपशहर क्षेत्र से आज सोमवार सुबह एक बेहद सनसनीखेज खबर सामने आई। यहाँ टाउन स्कूल परिसर में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अचानक भीषण आग लग गई। आग लगने की इस घटना से पूरे परिसर में अफरा-तफरी और सनसनी फैल गई। हालांकि, विद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस की त्वरित सतर्कता व जांबाजी के चलते समय रहते एक बहुत बड़ा और भयानक हादसा होने से टल गया। सभी छात्राएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।

शॉर्ट सर्किट बना आग का कारण, धुएं के गुबार से मची सनसनी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की दूसरी मंजिल पर स्थित जीने के नीचे रखे अतिरिक्त सामान, जिसमें स्कूल में बिछाने वाले फर्श और अन्य सामग्री शामिल थी, में अचानक बिजली के शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया।

वॉर्डन मुनेश कुमारी की सजगता ने बचाई 6 दर्जन मासूमों की जान

जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय विद्यालय परिसर में लगभग 6 दर्जन (72) छात्राएं मौजूद थीं। आग की लपटें उठती देख विद्यालय की वॉर्डन मुनेश कुमारी ने गज़ब की सूझबूझ और बहादुरी का परिचय दिया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए तत्काल सभी छात्राओं को सुरक्षित तरीके से नीचे खुले मैदान में भिजवाया। इसके बाद वॉर्डन ने खुद स्कूल में रखे आग बुझाने वाले गैस सिलेंडरों से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया और तुरंत स्थानीय पुलिस को मामले की सूचना दी।

कोतवाली प्रभारी टीम के साथ मौके पर कूदे, पाया काबू

सूचना मिलते ही अनूपशहर कोतवाली प्रभारी जितेंद्र कुमार दुबे भारी पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम, विद्यालय प्रशासन और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और कड़ी मशक्कत के बाद कुछ ही देर में आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया।

जरा सी चूक बन सकती थी त्रासदी: वॉर्डन मुनेश कुमारी की त्वरित सजगता और पुलिस की तत्परता के चलते किसी भी प्रकार की जनहानि या अप्रिय घटना नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वॉर्डन और पुलिस की तरफ से जरा भी लापरवाही या देरी हो जाती, तो सैकड़ों मासूम बच्चियों की जान आफत में आ सकती थी और यह घटना एक बड़ी त्रासदी में बदल सकती थी।

 


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