संभल:धनारी में स्वास्थ्य विभाग मौन, ‘यमराज’ बने झोलाछाप; अवैध अस्पतालों और फर्जी लैबों के मकड़जाल में पिस रही गरीब जनता

गुन्नौर/धनारी

संभल जनपद के धनारी क्षेत्र इन दिनों अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों, बिना डिग्रीधारी झोलाछाप डॉक्टरों और बिना लाइसेंस की पैथोलॉजी लैबों का मुख्य गढ़ बनता जा रहा है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

संभल जनपद के धनारी क्षेत्र इन दिनों अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों, बिना डिग्रीधारी झोलाछाप डॉक्टरों और बिना लाइसेंस की पैथोलॉजी लैबों का मुख्य गढ़ बनता जा रहा है। धनारी कस्बा स्थित बस स्टैंड और उसके आस-पास के इलाकों में बिना किसी वैध पंजीकरण के क्लीनिक खोलकर बैठे कथित ‘डॉक्टर’ खुलेआम मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इस गंभीर मामले में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे क्षेत्र की गरीब और मजबूर जनता आर्थिक और शारीरिक शोषण का शिकार हो रही है।

50 प्रतिशत तक कमीशनखोरी का खेल, अनावश्यक जांचों का बढ़ता बोझ

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, धनारी क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध लैब संचालकों के बीच एक संगठित ‘कमिशनखोरी’ का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। आरोप है कि मामूली सर्दी-जुकाम या बुखार से पीड़ित मरीजों को भी डरा-धमकाकर जबरन महंगी और अनावश्यक जांचें ब्लड टेस्ट, एक्स-रे आदि लिख दी जाती हैं।

इन जांचों के बदले फर्जी लैब संचालकों द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों को 40 से 50 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन नकद थमाया जाता है। इलाज के नाम पर हो रही इस खुली लूट के कारण ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब परिवारों की गाढ़ी कमाई पानी की तरह बह रही है।

रेलवे फाटक के पास फल-फूल रहा फर्जीवाड़ा, अंदाजे से हो रहा इलाज

ग्रामीणों ने विशेष रूप से चिन्हित करते हुए बताया कि धनारी रेलवे फाटक के आस-पास कई ऐसे अस्पताल और जांच केंद्र खुल गए हैं, जिनके पास न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एनओसी है और ना ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMO कार्यालय का वैध लाइसेंस। इन फर्जी केंद्रों पर गंभीर और जटिल बीमारियों का इलाज भी बिना किसी विशेषज्ञ एमडी या एमएस डॉक्टर की मौजूदगी के किया जा रहा है। केवल अंदाजे, तुक्के और हाई-डोज एंटीबायोटिक दवाओं के दम पर मरीजों को मौत के मुंह में धकेला जा रहा है, जो क्षेत्र में किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।

विभागीय साठगांठ पर सवाल, कागजों में सिमटी कार्रवाई

इस पूरे मकड़जाल ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्षेत्रीय नागरिकों का साफ कहना है कि विभागीय आला अधिकारियों और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों की मिलीभगत या मौन सहमति के बिना इतना बड़ा अवैध नेटवर्क लंबे समय तक खुलेआम संचालित नहीं हो सकता।

ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि समय-समय पर उच्च स्तर पर लिखित शिकायतें भेजे जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस एक्शन लेने के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं। कभी-कभार यदि दबाव में जांच होती भी है, तो वह केवल नोटिस देने या सीलिंग की औपचारिकता (खानापूरी) तक सीमित रहती है। कुछ ही दिनों बाद ये केंद्र नए नाम से दोबारा धड़ल्ले से चालू हो जाते हैं।

प्रशासनिक हंटर का इंतजार

भीषण गर्मी के इस मौसम में जब मौसमी बीमारियों का प्रकोप चरम पर है, तब इन फर्जी डॉक्टरों की चांदी कट रही है। अब क्षेत्र की प्रबुद्ध जनता को इस बात का इंतजार है कि समाचार के माध्यम से मामला उजागर होने के बाद जिला प्रशासन, संभल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और गुन्नौर तहसील प्रशासन इस ‘मौत के सौदागरों’ के खिलाफ कोई कड़ा एक्शन या सीलिंग की कार्रवाई अमल में लाते हैं, या फिर गरीब जनता यूं ही इनके रहमोकरम पर घुट-घुट कर जीने को मजबूर रहेगी।वहीं, ग्रामीणों में पेड़ के ठीक ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन को लेकर विद्युत विभाग के खिलाफ भी रोष देखा गया। पुलिस मामले की जांच कर आगामी आवश्यक विधिक कार्रवाई में जुट गई है।


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