महराजगंज: सादगी की मिसाल! एसडीएम शैलेन्द्र गौतम सरकारी गाड़ी छोड़ फरियादी के ई-रिक्शा से पहुंचे गांव; मौके पर ही निपटाया भूमि विवाद

आनंदनगर

उत्तर प्रदेश सरकार और शासन द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को जनता के बीच जाकर समस्याओं के त्वरित निस्तारण के दिए गए निर्देशों का महराजगंज जनपद में एक बेहद शानदार और अनूठा उदाहरण देखने को मिला है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश सरकार और शासन द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को जनता के बीच जाकर समस्याओं के त्वरित निस्तारण के दिए गए निर्देशों का महराजगंज जनपद में एक बेहद शानदार और अनूठा उदाहरण देखने को मिला है। यहाँ फरेंदा तहसील के उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र गौतम ने वीआईपी सुरक्षा और चमचमाती सरकारी गाड़ियों के तामझाम को दरकिनार कर सादगी की एक नई मिसाल पेश की। एसडीएम ने तहसील पहुंचे एक फरियादी की ही ई-रिक्शा में बैठकर उसके विवादित स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया और मौके पर ही दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से वर्षों पुराने भूमि विवाद का निस्तारण करा दिया।

ई-रिक्शा से भ्रमण: तेल की बचत भी और जनता का दर्द समझने का मौका भी

एसडीएम शैलेन्द्र गौतम की इस अनूठी और संवेदनशील पहल की पूरे आनंदनगर क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। इस सराहनीय कदम के बारे में बताते हुए उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र गौतम ने खुद साझा किया कि ई-रिक्शा के माध्यम से क्षेत्र का भ्रमण करने से न सिर्फ वर्तमान में चल रहे ईंधन संकट के बीच सरकारी तेल की बचत हुई, बल्कि इसके जरिए क्षेत्र की वास्तविक जमीनी समस्याओं और आम जनमानस की रोजमर्रा की कठिनाइयों से सीधे रूबरू होने का एक बेहतरीन अवसर भी प्राप्त हुआ। सरकारी गाड़ी के बंद शीशों से जो समस्याएं दिखाई नहीं देतीं, वे ई-रिक्शा की खुली सवारी से साफ नजर आईं।

बिना सुरक्षा गार्ड और अर्दली के आनंदनगर बाजार में घूमे एसडीए

अमूमन देखा जाता है कि जब भी कोई बड़ा प्रशासनिक अधिकारी क्षेत्र में निकलता है, तो उसके आगे-पीछे पुलिस बल, अर्दली और सुरक्षा गार्डों का काफिला चलता है। लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल उलट था। बिना किसी सुरक्षा गार्ड या अर्दली को साथ लिए, जब उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र गौतम केवल नायब तहसीलदार के साथ बेहद सामान्य तरीके से फरेंदा मुख्य बाजार में घूमे, तो राहगीर और स्थानीय दुकानदार भी दंग रह गए। इस दौरान उन्होंने बाजार की स्थानीय समस्याओं जैसे अतिक्रमण, जलजमाव और साफ-सफाई की वास्तविक स्थिति को करीब से देखा और लोगों को समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए आश्वस्त भी किया।

आम आदमी बनकर लिया तहसील की कार्यशैली का फीडबै

बाजार भ्रमण के दौरान एसडीएम ने एक आम नागरिक का रूप धारण कर चौराहों और दुकानों पर बैठे आम जनमानस से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने लोगों से बिना अपनी धौंस या पहचान जाहिर किए बेहद सहजता से बातचीत की और फरेंदा तहसील के कामकाज, फाइलों के निस्तारण, भ्रष्टाचार पर लगाम, और राजस्व कर्मियों लेखपाल व कानूनगो की कार्यशैली को लेकर सीधे जनता से ‘ग्राउंड फीडबैक’ लिया।

जनता ने भी बिना किसी डर और संकोच के तहसील की व्यवस्थाओं को लेकर अपनी बेबाक राय रखी। एसडीएम शैलेन्द्र गौतम ने बताया कि इस प्रकार के सीधे संवाद से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ती है और जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा मजबूत होता है। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के औचक और सादगीपूर्ण निरीक्षण जारी रखने की बात कही है।

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