बुलंदशहर: तहसील दिवस में सिस्टम की ‘क्रूरता’! न्याय की आस में धूप में रोती मिली 85 वर्षीय विधवा, महीनों से काट रही चक्कर

शिकारपुर

बुलंदशहर जनपद की शिकारपुर तहसील से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने तहसील समाधान दिवस के दावों और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद की शिकारपुर तहसील से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने तहसील समाधान दिवस के दावों और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ अपनी जमीन की पैमाइश के लिए महीनों से भटक रही एक 85 वर्षीय बुजुर्ग विधवा महिला जब थक-हारकर परिसर में एक पेड़ के नीचे बैठकर रोने लगी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

क्या है बुजुर्ग महिला की पीड़ा?

ग्राम खंडवा निवासी मोहर कली (85 वर्ष), पत्नी स्वर्गीय इंद्रजीत सिंह, शनिवार को तहसील दिवस में अपनी फरियाद लेकर पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि उनके पति ने काफी समय पहले ग्राम चाकला में कुछ जमीन खरीदी थी। अब उस जमीन की पैमाइश और बंदोबस्ती के लिए वह पिछले कई महीनों से कानूनगो और पटवारी के दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी उम्र और लाचारी पर किसी को तरस नहीं आ रहा।

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धूप में बैठकर फूट-फूटकर रोईं मोहर कली

बुजुर्ग महिला तहसील परिसर में चिलचिलाती धूप के बीच एक पेड़ के नीचे बैठी रोती हुई मिलीं। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। उनकी यह हालत देखकर तहसील में मौजूद अन्य फरियादियों और स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस घोर लापरवाही पर कड़ा आक्रोश जताया।

लेखपाल का पल्ला झाड़ने वाला बयान

इस प्रकरण में जब संबंधित लेखपाल लोकेंद्र सिंह से जानकारी ली गई, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा— “पूरे बंदोबस्त की प्रक्रिया धारा 116 के तहत कर दी गई है। अब जमीन की नाप-जोख (पैमाइश) का कार्य कानूनगो साहब के स्तर से होना है, इसलिए आगे की कार्रवाई वही करेंगे।

व्यवस्था पर उठते सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि बुजुर्गों और असहाय लोगों की शिकायतों का प्राथमिकता पर निस्तारण हो, लेकिन शिकारपुर तहसील में नियम हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। यदि एक 85 साल की महिला को अपनी ही जमीन की नाप के लिए महीनों तक दफ्तरों की धूल फांकनी पड़े, तो फिर समाधान दिवस का औचित्य ही क्या रह जाता है?

 

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