सिद्धार्थनगर : मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर और छात्र की नदी में डूबकर मौत, बेटे के साथ डूबी रिक्शा वाले पिता की उम्मीद!

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर जनपद के जोगिया थाना क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती नदी में नहाने गए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के एक जूनियर डॉक्टर और एक द्वितीय वर्ष के छात्र की गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई।


वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 संवाददाता के मुताबिक, आज सोमवार को मेडिकल कॉलेज के चार छात्र और एक जूनियर डॉक्टर (JR) घूमने और नहाने के लिए जोगिया क्षेत्र स्थित नदी के तट पर गए थे। नहाते समय वे पानी की गहराई का सही अंदाजा नहीं लगा सके और गहरे पानी की चपेट में आ गए।
दोनों को डूबता देख साथ मौजूद अन्य छात्रों ने शोर मचाया और तत्काल पुलिस को सूचना दी। स्थानीय ग्रामीणों और गोताखोरों ने भारी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।

मृतकों की पहचान डॉ. सत्यम नायक (JR) निवासी बस्ती शहर, जनपद बस्ती तथा दूसरा सचिन महावर (22 वर्ष) मेडिकल कॉलेज के द्वितीय वर्ष के छात्र, निवासी सवाई माधोपुर, राजस्थान के रूप में हुई है।

बेटे सचिन के साथ डूबी रिक्शा वाले पिता की उम्मीद

वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 संवाददाता को मिली जानकारी अनुसार, मृतक सचिन के पिता रिक्शा चालक हैं, जो खुद भीषण गर्मी में इस उम्मीद से पसीना बहाते हैं कि उनका बेटा पढ़-लिख कर डाॅक्टर बनें। लेकिन किस्मत और ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। पल भर में ही पिता का वह सपना चकनाचूर हो गया।

मेहनत नहीं किस्मत से हारा पिता

बेटे को डाॅक्टर बनाने के लिए तेज़ गर्मी में भी पिता ने कमरतोड़ मेहनत किया और कभी हार नहीं माना, लेकिन किस्मत ने इस तरह मुंह फेर लिया कि गरीब पिता न हारकर भी हार गया और उसके सपने और उसका बेटा पल भर में ही ओझल हो गया।

अब जरा ये सोचिए कि जो पिता इस उम्मीद से चिलचिलाती धूप में रिक्शा खींचता था कि एक दिन उसकी मेहनत रंग लाएगी और उसका बेटा डॉक्टर की कुर्सी पर बैठेगा। लेकिन,जब आंखों के सामने पिता के ये सपने चकनाचूर हो रहे थे, तो उस पिता के दिल पर क्या बीत रहा होगा। जो आंखें बेटे को डाॅक्टर की कुर्सी पर बैठते देखना चाहतीं थीं, उन्हीं आंखों से वह मासूम पिता बेटे को अर्थी पर लेटा हुआ कैसे देख सकेग?

सजाए थे सपने,अब सजेगी अर्थी

सचिन के पिता को पूरा विश्वास था कि उनका बेटा एक न एक दिन डाॅक्टर बनेगा और पिता के दिलों में सजाए सपने को पूरा कर उन्हें गौरवान्वित महसूस कराएगा। लेकिन किस्मत का खेल देखिए, सपने सजाने वाले पिता को अब बेटे की अर्थी सजानी होगी और सारे सपने और उम्मीदों को मुखाग्नि के आग में झोंकना पड़ेगा।

 

Voice Of News 24

 

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