गोरखपुर
गोरखपुर में पुलिस ने 6 मरीज माफियाओं को गिरफ्तार किया है। जिनमें सरकारी एम्बुलेंस ड्राइवर से लेकर, ईएमटी, दो अस्पतालों के मैनेजर और प्राइवेट एम्बुलेंस ड्राइवर शामिल हैं। सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

गोरखपुर जनपद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। चाहे हत्याकांड या किसी बड़ी वारदात या फिर भ्रष्टाचार जैसे आश्चर्यजनक घटनाक्रम, गोरखपुर जनपद में पुलिसिया कार्रवाई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मनसूबे पर पानी फेर रहें हैं।
भ्रष्टाचार से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आते ही लोग सहम जा रहें हैं और मामला सुनते ही दांतों तले उंगली दबा ले रहें हैं।

दरअसल गोरखपुर में पुलिस ने हॉस्पिटल मैनेजर सहित 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया, यह आश्चर्य की बात नहीं है। आश्चर्य की बात तो ये है कि जिन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वे लोग मौत के बाद बच्ची को प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराने की कोशिश कर रहे थे। जिन्हें देखते ही गार्डों ने तुरंत पकड़ लिया।
मिली जानकारी अनुसार, सभी इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन की मदद से परिजनों को बरगलाकर मरी हुई बच्ची का इलाज कराने के नाम पर प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराने की तैयारी में थे और BRD मेडिकल कॉलेज के मेन गेट के सामने एक प्राइवेट एम्बुलेंस में बैठा रहे थे। तभी गार्डों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मुताबिक, 5 से 10 हजार रुपए तक का कमीशन पाने के लिए ईएनटी और सरकारी एम्बुलेंस ड्राइवर प्राइवेट हॉस्पिटल से संपर्क कर मरीजों को भेजते थे।
इस संबंध में गुलरिहा पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 14 अप्रैल को सिद्धार्थनगर जिले से गंभीर हालत में बच्ची को 108 सरकारी एम्बुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज लाया गया था। 500 नंबर बेड के बाल रोग संस्थान में ईएमटी वेद प्रकाश और चालक राहुल ने बच्ची को दिखाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद दोनों, बच्ची को बाहर ले आए और परिजनों से कहा कि उसकी हालत गंभीर है और वेंटिलेटर भी खाली नहीं है। इसलिए पहचान के निजी अस्पताल में भर्ती करा दें। डरे-सहमे परिजनों की सहमति मिलने पर ईएमटी वेद प्रकाश (निवासी भागलपुर, थाना पीपीगंज) और राहुल (निवासी कटुई, थाना ललिया, जिला बलरामपुर) ने तारामंडल स्थित सानवी अस्पताल के मैनेजर राहुल शर्मा को फोन किया। राहुल शर्मा ने दूरी का हवाला देकर फातिमा रोड स्थित गौरी अस्पताल के मैनेजर अंकित शुक्ला को जानकारी दी। इसी दौरान सानवी अस्पताल की एम्बुलेंस के चालक गुंजेश यादव ने बीआरडी गेट के पास स्थित शौचालय के बाहर बच्ची को निजी एम्बुलेंस में बैठाने का प्रयास किया। तभी गार्डों ने पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दे दी। पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने बचने के लिए आनन-फानन में मृत बच्ची की दोबारा पर्ची तक कटवा दी, ताकि कार्रवाई से बच सकें।
जब पुलिस ने उक्त आरोपियों को गिरफ्तार किया तो पूछताछ में सामने आया कि राहुल शर्मा (निवासी गाईबेला, थाना सिकरीगंज) के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और उसकी अंकित शुक्ला (निवासी पकड़ी मिसरा, थाना कटया, जिला गोपालगंज) से मिलीभगत है। दोनों देवरिया, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर के कई सरकारी एम्बुलेंस चालकों से साठगांठ कर मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजते थे। इसके बदले ईएमटी और चालक 5 से 10 हजार रुपये तक कमीशन लेते थे।
इसके बाद निजी एम्बुलेंस चालक गुंजेश यादव (निवासी बंधवा, थाना रामकोला, जिला कुशीनगर) और अमन पांडेय (निवासी घोरही, थाना महुली, जिला संतकबीरनगर) मरीजों को बीआरडी से निजी अस्पताल तक पहुंचाने का काम करते थे।
वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 संवाददाता के मुताबिक, बीआरडी प्राचार्य रामकुमार जायसवाल की तहरीर पर गुलरिहा पुलिस ने बुधवार देर रात निजी एम्बुलेंस चालक व अन्य अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था। जांच में सभी आरोपियों की संलिप्तता सामने आने पर गुरुवार सुबह बीआरडी के सीआरसी बिल्डिंग के पीछे से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
जहां मूर्दों से भी रिश्वत लिया जा रहा हो, वहां की शासन व्यवस्था और कार्रवाई के गुणवत्ता की कल्पना की जा सकती है। खासकर गोरखपुर,जो सूबे के मुखिया का गढ़ हो और वहां से जब ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, तो अन्य जगहों पर क्या हाल होता होगा? उक्त मामले से अंदाजा लगाया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस ने उक्त गैंग का पर्दाफाश करते हुए आरोपियों को सलाखों के पीछे खड़ा कर दिया है और मामले से जुड़े अन्य लोगों के मनसूबों को नेस्तनाबूद कर दिया है।
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