क्या ग्लोबल पुलिस से ग्लोबल गुंडा बन गया है अमेरिका? सुमित सैनी की कलम से

आज की वैश्विक राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। क्या अमेरिका की ग्लोबल पुलिसिंग अब खुली गुंडागर्दी में तब्दील हो चुकी है? पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

आज पूरी दुनिया में एक ही चर्चा है। क्या अमेरिका अपनी मर्यादा भूलकर मनमानी पर उतर आया है? अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर दूसरे देशों की सरहदों तक, अमेरिका की बढ़ती दखलअंदाजी अब पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा सवाल बन गई है।

हथियार, तेल और टैरिफ का जाल

दुनिया भर के देशों के सामने अमेरिका ने एक अलिखित शर्त रख दी है हथियार हमसे खरीदो, तेल का व्यापार हमारे हिसाब से करो, वरना टैरिफ और प्रतिबंधों की मार झेलने के लिए तैयार रहो। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी करेंसी डॉलर के वर्चस्व को हथियार बनाकर अमेरिका ने कई अर्थव्यवस्थाओं को घुटनों पर ला दिया है।हाल ही में भारत से नाराजगी के बीच अमेरिका ने टैरिफ का खेल खेलकर दबाव बनाने की कोशिश की है। अपनी करेंसी डॉलर के दम पर वह कई देशों की कमर तोड़ चुका है।

 

दुबई, अबू धाबी और सऊदी अरब जैसे समृद्ध देशों से सुरक्षा के नाम पर करोड़ों डॉलर वसूलने वाले अमेरिका के लिए अब हालात पहले जैसे नहीं रहे। खाड़ी देशों ने अब यह समझना शुरू कर दिया है कि उनकी सुरक्षा के नाम पर अमेरिका केवल अपनी बिसात बिछा रहा है।

हजारों किलोमीटर दूर बैठकर दूसरे देशों की जमीन का इस्तेमाल करना और वहां अपनी सैन्य चौकियां बनाना, सुरक्षा नहीं बल्कि रणनीतिक कब्जा है।

ईरान में हाल ही में जिस तरह से पूरी टॉप लीडरशिप और सेना के शीर्ष अधिकारियों को एक साथ निशाना बनाया गया, उसने दुनिया को दहला दिया है। यह केवल एक हमला नहीं बल्कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है।

अमेरिका पर आरोप लग रहे हैं कि वह जिस भी देश के नेता से असहमत होता है, उसे आतंकवादी घोषित कर किडनैप या खत्म करने की साजिश रचता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका की इस बढ़ती गुंडागर्दी को समय रहते नहीं रोका गया, तो आज जो ईरान के साथ हुआ है, कल वह किसी भी दूसरे देश के साथ हो सकता है।

 

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