सरकार सवर्ण विरोधी का तमगा न ले, यूजीसी कानून पर करें पुनर्विचार: रौशन सिंह

बलिया

बलिया जनपद के उमा ग्रुप ऑफ कंपनी के संस्थापक और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता रौशन सिंह “चंदन” ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बलिया जनपद के उमा ग्रुप ऑफ कंपनी के संस्थापक और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता रौशन सिंह “चंदन” ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह ‘सवर्ण विरोधी’ होने का तमगा न ले, अन्यथा आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में मीडिया से बात करते हुए रौशन सिंह ने कहा कि यूजीसी के नए कानून में समानता के अधिकार का हनन हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि झूठी शिकायत पाए जाने पर भी शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान न होना न्यायसंगत नहीं है।

प्रमुख आपत्तियां और सवाल

असमानता का आरोप: रौशन सिंह ने पूछा कि क्या समानता का अधिकार केवल आरक्षित वर्गों के लिए है? उन्होंने इस कानून की तुलना बिना ब्रेक वाले हाईवे से की।

ऐतिहासिक संदर्भ: उन्होंने राजा हरिश्चंद्र और डॉ. अंबेडकर के जीवन के उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में भेदभाव का वह स्वरूप नहीं था, जैसा आज वोट बैंक की राजनीति के लिए पेश किया जाता है।

आरक्षण और मेरिट: उन्होंने 90% अंक लाने वाले सवर्ण युवाओं और अधिक फीस के बोझ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रतिभा के साथ यह कैसा न्याय है?

रौशन सिंह ने अंत में सरकार से अपील की कि भाजपा जिस भेदभाव मुक्त समाज का सपना देखती है, यूजीसी का यह कानून उसमें अवरोधक बनेगा। उन्होंने मांग की कि कानून में संशोधन कर झूठी शिकायत करने वालों पर भी सजा का प्रावधान किया जाए।

 

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