महराजगंज: बाराबंकी टोल प्लाजा पर वकीलों से मारपीट के विरोध में उबला फरेंदा, CM को भेजा पत्र

फरेंदा

महराजगंज जनपद के फरेंदा में बाराबंकी जिले के एक टोल प्लाजा पर अधिवक्ताओं के साथ हुई बर्बरता और मारपीट की घटना ने अब पूरे उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता समाज को आक्रोशित कर दिया है। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद के फरेंदा में बाराबंकी जिले के एक टोल प्लाजा पर अधिवक्ताओं के साथ हुई बर्बरता और मारपीट की घटना ने अब पूरे उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता समाज को आक्रोशित कर दिया है। इसी क्रम में आज दीवानी कचहरी फरेंदा के अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक मांग पत्र उपजिलाधिकारी फरेंदा के माध्यम से सौंपा। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा।

घटना बीते गुरुवार शाम की है, जब बाराबंकी कचहरी से कार्य निपटाकर  अधिवक्ता अपने निजी वाहन से घर लौट रहे थे। बाराबंकी के एक टोल प्लाजा पर टोल शुल्क को लेकर टोलकर्मियों और अधिवक्ताओं के बीच मामूली बहस शुरू हुई। आरोप है कि टोलकर्मियों ने कानून को हाथ में लेते हुए अधिवक्ता पर जानलेवा हमला बोल दिया और उनके साथ जमकर मारपीट की, जिससे वे लहूलुहान हो गए।

इस घटना की खबर मिलते ही आज फरेंदा दीवानी कचहरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कुमार सिंह और महामंत्री अजीतमणि त्रिपाठी के नेतृत्व में दर्जनों अधिवक्ता लामबंद हुए।

अध्यक्ष प्रेम कुमार सिंह ने कहा हमारे साथी अधिवक्ता जनता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन आज वे खुद सड़क पर असुरक्षित हैं। टोलकर्मियों का यह कृत्य असहनीय है। हम दोषियों पर तत्काल रासुका जैसी कार्रवाई की मांग करते हैं।

ज्ञापन लेने के बाद उपजिलाधिकारी फरेंदा ने वकीलों को आश्वस्त किया कि उनकी भावनाओं और मांग पत्र को तत्काल शासन तक भेजा जा रहा है।

टोल प्रबंधन पर भी उठे सवाल

विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने टोल प्लाजा पर होने वाली अवैध वसूली और कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की है कि टोल प्रबंधन को पारदर्शी बनाया जाए और वहां तैनात कर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य हो।

मुख्यमंत्री को पत्रक सौंपने वालों में मुख्य रूप से अध्यक्ष प्रेम कुमार सिंह, महामंत्री अजीत मणि, सुधेश मोहन श्रीवास्तव, रामसहाय गुप्ता, स्कंद श्रीवास्तव, मोहम्मद हई खाँ, मनोज मिश्रा, रविन्द्र नाथ उपाध्याय, उमाकान्त विश्वकर्मा और अभिषेक अग्रहरी सहित भारी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

 

 

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