बुलंदशहर: 102 साल के बुजुर्ग की ‘शाही’ विदाई, डीजे की धुन और गुलाल की होली के बीच निकला अंतिम सफर

अनूपशहर

बुलंदशहर जनपद में मृत्यु को शोक नहीं, बल्कि एक उत्सव के रूप में मनाने की अनूठी परंपरा बुलंदशहर के रोड गांव में देखने को मिली।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद में मृत्यु को शोक नहीं, बल्कि एक उत्सव के रूप में मनाने की अनूठी परंपरा बुलंदशहर के रोड गांव में देखने को मिली। यहाँ 102 वर्षीय बुजुर्ग अमीन चांद के निधन के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने उन्हें किसी राजा की तरह विदाई दी। गमगीन माहौल के बजाय पूरा गांव डीजे की धुन पर थिरकता और गुलाल उड़ाता नजर आया।

उत्सव में बदली अंतिम यात्रा

आमतौर पर अंतिम यात्रा में सन्नाटा या मातम होता है, लेकिन 102 साल का लंबा और खुशहाल जीवन जीने वाले अमीन चांद की अंतिम विदाई बिल्कुल अलग थी। डीजे पर बजते भजनों और देशभक्ति गीतों के बीच ग्रामीणों ने नाचते-गाते हुए शव यात्रा निकाली। रास्ते भर गुलाल उड़ाया गया, जिसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो गांव में कोई बड़ा त्यौहार मनाया जा रहा हो।

जेपी घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

बुजुर्ग की अंतिम यात्रा गांव की गलियों से होते हुए जेपी घाट पहुंची। इस दौरान न केवल पुरुष, बल्कि महिलाएं और बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। रास्ते भर लोगों ने फूल बरसाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मृतक के पुत्र दलवी सिंह ने बताया कि उनके पिता पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। कल अचानक तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

क्षेत्र में बनी चर्चा का विषय

सवा सौ साल के करीब पहुंचे बुजुर्ग की यह ‘विजय यात्रा’ पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्ण आयु प्राप्त करने वाले बुजुर्ग का जाना दुख का नहीं, बल्कि उनके सफल जीवन के उल्लास का प्रतीक है। जेपी घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।

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