आगरा
ताजनगरी आगरा से इंसानियत और साहस की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल चिकित्सा जगत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

ताजनगरी आगरा से इंसानियत और साहस की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल चिकित्सा जगत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि एक डॉक्टर के लिए मरीज की जान से बढ़कर कुछ नहीं होता। डॉ. सुलेखा चौधरी ने वह कर दिखाया जिसे लोग किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।
‘देवदूत’ बनीं डॉ. सुलेखा
घटना उस वक्त की है जब अस्पताल में एक नवजात की हालत बिगड़ने लगी मशीनें खामोश हो गईं और मासूम की सांसे उखड़ने लगीं। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था और बच्चे के पास समय बहुत कम था।
ऐसी नाजुक स्थिति में डॉ. सुलेखा चौधरी ने बिना एक पल गंवाए प्रोटोकॉल और संसाधनों की कमी को पीछे छोड़ा। उन्होंने तत्काल अपने मुंह से नवजात को ऑक्सीजन (Mouth-to-Mouth Resuscitation) देना शुरू किया।
7 मिनट का वह संघर्ष और जीती हुई जंग
डॉक्टर सुलेखा करीब 7 मिनट तक लगातार मासूम को अपनी सांसों के जरिए ऑक्सीजन देती रहीं। यह 7मिनट मौत और जिंदगी के बीच के संघर्ष के थे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और बच्चे के शरीर में हरकत हुई। जो मशीनें खामोश हो गई थीं, उनकी जगह बच्चे की किलकारी ने अस्पताल के सन्नाटे को तोड़ा।
सोशल मीडिया पर हो रही सराहना
डॉ. सुलेखा चौधरी की इस बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की वीडियो और तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। लोग कह रहे हैं कि यह केवल इलाज नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे ऊंचा स्तर है।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) December 27, 2025




















