महराजगंज
बदलते मौसम और कड़ाके की ठंड ने जहाँ जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं शारीरिक समस्याओं, विशेषकर जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों की जकड़न के मामलों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बदलते मौसम और कड़ाके की ठंड ने जहाँ जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं शारीरिक समस्याओं, विशेषकर जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों की जकड़न के मामलों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। इस गंभीर विषय पर केएमसी मेडिकल कॉलेज के फिजियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय कुशवाहा ने आधुनिक जीवनशैली में फिजियोथेरेपी की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला है।
ठंड में क्यों बढ़ जाता है दर्द?
डॉ. कुशवाहा के अनुसार, सर्दियों में तापमान गिरने से हमारी रक्त वाहिकाओं में संकुचन होता है। इससे शरीर के ऊतकों (tissues) तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और पुरानी चोटें फिर से उभरने लगती हैं।
केएमसी मेडिकल कॉलेज: वैज्ञानिक पद्धति से उपचार
डॉ. धनंजय कुशवाहा ने बताया कि केएमसी मेडिकल कॉलेज का फिजियोथेरेपी विभाग इन समस्याओं के समाधान हेतु पूरी तरह सुसज्जित है। यह चिकित्सा प्रणाली शरीर की संरचना पर आधारित है, जो बिना दवाओं के दर्द नियंत्रण और गतिशीलता सुधारने पर केंद्रित है।
प्रमुख तकनीकें: विभाग में इलेक्ट्रोथेरेपी, हीट थेरेपी, अल्ट्रासाउंड थेरेपी और विशेष चिकित्सकीय व्यायाम के जरिए मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
लाभ: इससे न केवल रक्त संचार बेहतर होता है, बल्कि मांसपेशियों की शक्ति में भी वृद्धि होती है।
इन मरीजों के लिए ‘वरदान’ है फिजियोथेरेपी
डॉ. कुशवाहा ने विशेष रूप से सलाह दी है कि निम्नलिखित मरीजों को सर्दियों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए:
बुजुर्ग और गठिया (Arthritis) से पीड़ित व्यक्ति।
रीढ़ की हड्डी और जोड़ों के पुराने दर्द से ग्रसित मरीज।
स्ट्रोक, पार्किंसन और न्यूरोलॉजिकल विकारों के रोगी।
अनदेखी पड़ सकती है भारी
विशेषज्ञ का कहना है कि लोग अक्सर सर्दियों के दर्द को सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं, जो भविष्य में गंभीर अक्षमता का कारण बन सकता है। समय पर मसल स्ट्रेंथनिंग (मांसपेशियों की मजबूती) और पोस्चर करेक्शन (उठने-बैठने का सही तरीका) जैसी तकनीकों को अपनाकर भविष्य में होने वाली बड़ी सर्जरी और भारी दवाओं के सेवन से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य संदेश
आधुनिक जीवनशैली, चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण, शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण शरीर को कमजोर बना रही है। ऐसे में डॉ. धनंजय कुशवाहा का मानना है कि फिजियोथेरेपी केवल एक उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का एक अनिवार्य माध्यम है।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) December 23, 2025

















