महराजगंज : पहले भगवान ने छीना पति फिर आशियाने में बेटे को रौंदा बोलेरो, बूझ गया इकलौता चिराग,बूढ़ी मां की उजड़ गई बगिया

महराजगंज

महराजगंज जनपद, एक बार फिर बुजुर्ग मां के धधकते कलेजे और बेटे की आहट में घुट-घुट कर जीने का गवाह बन गया है, जिसका एक मात्र कारण है भयावह दुर्घटना और सुरक्षा नियमों की लापरवाही तथा रफ्तार का कहर।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद, एक बार फिर बुजुर्ग मां के धधकते कलेजे और बेटे की आहट में घुट-घुट कर जीने का गवाह बन गया है, जिसका एक मात्र कारण है भयावह दुर्घटना और सुरक्षा नियमों की लापरवाही तथा रफ्तार का कहर।
वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 संवादाता के मुताबिक, निचलौल थाना क्षेत्र के ग्राम सभा ढे़सो में निचलौल-ढ़ेसो मार्ग के किनारे स्थित एक झोंपड़ी के भीतर, बीती रात बूढ़ी मां अपने बेटे के साथ खाना खाने के बाद सोने जा ही रही थी कि तभी अचानक एक तेज़ रफ़्तार अनियंत्रित बोलेरो झोपड़ी में जा घुसा, जो उस बुजुर्ग मां की कलेजे के टुकड़े को उसी के आंखों के सामने रौंदकर मौत के घाट उतार दिया।

वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 संवादाता को मिली जानकारी अनुसार, मृतक युवक का नाम सूरज पांडेय था,जिसकी उम्र 28 वर्ष बताई जा रही है, वहीं माता सावित्री (65) इस हादसे में बाल-बाल बच गईं लेकिन अपने इकलौते चिराग़ से हाथ धो बैठीं। सूरज के पिता, चित्रकूट पिछले करीब 10 वर्ष पहले ही अपनी पत्नी और बेटे का साथ छोड़ जुदा हो गए थे।
पिता की मौत के बाद, सूरज अपने घर की जिम्मेदारी उठा लिया और मेहनत-मजदूरी करके अपना और अपने मां का पेट भरता था, लेकिन अब वह बुजुर्ग मां का इकलौता चिराग सूरज के रूप में बुझ गया। कभी सूरज की वजह से उस झोपड़ी में खुशियों की रोशनी फैली रहती थी, लेकिन आज वह झोपड़ी तहस-नहस हो गई और मां का इकलौता सूरज हमेशा के लिए डूब गया।

तेज़ रफ़्तार बोलेरो न केवल झोपड़ी और सूरज को रौंदा बल्कि उस बूढ़ी मां के अरमानों, सपनों और अभिलाषाओं को कुचलकर रख दिया।
जिस सूरज को देखने के बाद मां का सवेरा हुआ करता था,आज वही सूरज हादसे में दम तोड़ दिया और उसकी मां का जीवन अंधकार में पड़ने के साथ-साथ बूढ़ी माता के इकलौते भरोसे और उम्मीद का सूरज अस्त हो गया।

पिता की मौत के बाद सूरज अपने मां के जीवन का बागडोर संभाल लिया था, लेकिन आज वह डोर टूट गई और बूढ़ी मां की बगिया उजड़ गई।
अब सवाल यह है कि उस बेसहारे मां का कैसे होगा अगला सवेरा? क्योंकि हादसे में छिप गया उसका सूर्य। कौन थामेगा बेसहारे मां के जीवन की बागडोर? बेटे सूरज के लिए मां के कलेजे की आग को कौन बुझाएगा? आखिर कौन बनेगा बूढा़पे की लाठी? कौन लगाएगा उस बूढ़ी मां के जीवन की नईया पार? ऐसे कई सवाल सभी के कालेजों में आग लगा रहें हैं।

 

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