सिद्धार्थनगर:मानवता की अनोखी मिसाल, साजिदा हॉस्पिटल ने किया गंभीर रूप से बीमार नवजात का नि:शुल्क उपचार, परिजन हुए भावुक

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज स्थित साजिदा हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने मानवता और सेवाभाव की एक अद्वितीय मिसाल पेश की है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज स्थित साजिदा हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने मानवता और सेवाभाव की एक अद्वितीय मिसाल पेश की है। हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. रफीउल्लाह खान और डॉ. अब्दुल्ला खान ने गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्चों का करीब डेढ़ महीने तक न सिर्फ इलाज किया, बल्कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार से एक भी रुपया नहीं लिया। लंबे उपचार के बाद आज बच्चों को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज किया गया, जिससे परिजन खुशी से झूम उठे और डॉक्टरों का तहे दिल से आभार व्यक्त किया।

 डेढ़ महीने तक NISU वार्ड में चला नि:शुल्क इलाज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डिलीवरी के बाद नवजात बच्चों की हालत गंभीर थी। परिजन जब उन्हें लेकर बैदोला स्थित साजिदा हॉस्पिटल पहुंचे, तो डॉ. रफीउल्लाह खान ने उनकी गंभीर स्थिति और परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति को समझा।

डॉ. खान ने तत्काल पहल करते हुए बच्चों का इलाज हॉस्पिटल के NISU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) वार्ड में नि:शुल्क शुरू करवा दिया।

आर्थिक तंगी के कारण जब परिवार बच्चों का इलाज आगे जारी रखने में असमर्थ हो गया, तो डॉ. अब्दुल्ला खान भी आगे आए और उन्होंने भी बच्ची के संपूर्ण उपचार का खर्च स्वयं उठाने का फैसला लिया।

गोरखपुर रेफर के बाद भी नहीं टूटी सेवा की डोर

बताया गया कि नवजातों को पहले बस्ती से गोरखपुर रेफर किया गया था, लेकिन किसी कारणवश परिवार को वापस साजिदा हॉस्पिटल लौटना पड़ा। डॉ. रफीउल्लाह खान ने इस मजबूरी को समझते हुए बिना किसी शुल्क की चिंता किए, बच्चों का इलाज लगातार जारी रखा।

डॉक्टरों की अथक मेहनत और सेवा भावना के कारण, बच्चों की सेहत में लगातार सुधार हुआ और करीब डेढ़ महीने के सघन उपचार के बाद आज उन्हें पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर डिस्चार्ज कर दिया गया।

परिजनों ने जताया आभार, क्षेत्र में हो रही सराहना

डिस्चार्ज के समय नवजात के परिजन भावुक हो उठे। उन्होंने साजिदा हॉस्पिटल की इस महान सेवा और डॉ. रफीउल्लाह खान तथा डॉ. अब्दुल्ला खान के नेक कदम के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

साजिदा हॉस्पिटल की यह सेवाभावना और डॉ. रफीउल्लाह खान द्वारा उठाया गया यह मानवता भरा कदम पूरे सिद्धार्थनगर और डुमरियागंज क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसकी खुलकर सराहना हो रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डॉक्टरी केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक महान सेवा भी है।

 

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