Voice of news 24
25 Aug 2023 01 :30AM
गोरखपुर/महराजगंज
एक दशक में पूर्वांचल और प्रदेश की शियासत की बागडोर को अपने इशारे पर चलाने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की सत्ता को पलटने की कूबत रखने वाले अमरमणि त्रिपाठी को कौन नही जानता? अपने व्यक्तिगत रवैये और कार्यशैली से चर्चित नेता और मंत्री रहे अमरमणि त्रिपाठी को एक दौर में शेर- ए-पूर्वांचल का नाम दिया गया था।लेकिन वक्त का तारिख और समय के चक्र ने किसी को नही छोड़ा है, वही हुआ अमरमणि त्रिपाठी के भी साथ और लंबे वक्त से एक कैदी की जिंदगी जी रहे उनकी पत्नी और वो दोनों के लिए इस वक्त दिल को सुकून देने वाली खबर सामने आई है।आप भी जान लीजिए अमरमणि त्रिपाठी की राजनीति से लेकर प्रेमनीति और कारागार तक का पूरा सफरनामा

लंबे समय से कारागार की कालकोठरी में बंद उत्तर प्रदेश के पूर्वमंत्री और महराजगंज जिले के नौतनवां विधानसभा कई बार के विधायक रहे अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि को अच्छे आचरण की वजह से बची सजा को समाप्त किया गया है।
कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी करार दिए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमिता त्रिपाठी को शासन ने रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है। राज्यपाल की अनुमति पर कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग ने इसका आदेश जारी किया है।

आदेश में कहा गया है कि यदि दाेनों को किसी अन्य वाद में जेल में निरुद्ध रखना आवश्यक न हो, तो जिला मजिस्ट्रेट गोरखपुर के विवेक के अनुसार दो जमानतें तथा उतनी ही धनराशि का एक मुचलका प्रस्तुत करने पर कारागार से मुक्त कर दिया जाए। बता दें कि करीब 20 वर्ष पहले राजधानी की पेपरमिल कॉलोनी में रहने वाली कवियत्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के मामले की जांच सीबीआई ने की थी। सीबीआई ने अपनी जांच में अमरमणि और मधुमणि को दोषी करार देते हुए अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। बाद में इस मामले का मुकदमा देहरादून स्थानांतरित कर दिया गया था। दोनों जेल में बीते 20 वर्ष एक माह और 19 दिन से थे। उनकी आयु, जेल में बिताई गई सजा की अवधि और अच्छे जेल आचरण के मद्देनजर बाकी बची हुई सजा को माफ कर दिया गया है।
जेल में भी कम नहीं हुआ अमरमणि का दबदबा, बेटा भी पत्नी की हत्या का आरोपी
लखनऊ में निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में 9 मई 2003 को चर्चित कवियत्री मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हुई हत्या से तत्कालीन मायावती(बसपा) सरकार में हड़कंप मच गया था। चंद मिनटों में मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों को मधुमिता और अमरमणि के प्रेम प्रसंग के बारे में नौकर देशराज ने जानकारी दी, तो तत्काल शासन के अधिकारियों को सूचित किया गया। दरअसल अमरमणि बसपा सरकार के कद्दावर मंत्रियों में शुमार किए जाते थे। इस हत्याकांड के बाद देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2007 को अमरमणि, उनकी पत्नी मधुमणि, भतीजा रोहित चतुर्वेदी और शूटर संतोष राय को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन यूपी के सियासी गलियारों में अमरमणि की हनक कभी कम नहीं हुई और वो जेल से ही अपनी हुकूमत चलाते थे।

आपको यह भी अवगत करा दें कि इस हत्याकांड की जांच तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने सीबीसीआईडी को सौंपी थी। मधुमिता के शव का पोस्टमार्टम करने के बाद उसके गृह जनपद लखीमपुर खीरी भेजा गया। अचानक एक पुलिस अधिकारी की नजर रिपोर्ट पर लिखी एक टिप्पणी पर पड़ी, जिसने इस मामले की जांच की दिशा बदल दी। दरअसल, रिपोर्ट में मधुमिता के गर्भवती होने का जिक्र था। तत्काल शव को रास्ते से वापस मंगवाकर दोबारा परीक्षण कराया गया। डीएनए जांच में सामने आया कि यह बच्चा अमरमणि त्रिपाठी का था। निष्पक्ष जांच के लिए विपक्ष के बढ़ते दबाव की वजह से बसपा सरकार को आखिरकार इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति करनी पड़ी। विपक्ष सत्ता पक्ष पर हर स्तर से हाबी था और सीबीआई जांच के दौरान भी गवाहों को धमकाने के आरोप लगे तो मुकदमा देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया। देहरादून की अदालत ने चारों को दोषी करार दिया, जबकि एक अन्य शूटर प्रकाश पांडेय को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हालांकि बाद में नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रकाश पांडेय को भी दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
बचाव में मंत्री की पत्नी निकल गई थी नेपाल, सीबीआई को मुश्किल से मिला देशराज गवाह
सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की तो अमरमणि और उनकी पत्नी की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण मिले, जिसके बाद अमरमणि को गिरफ्तार कर लिया गया। उससे राजधानी के डालीबाग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। वहीं अमरमणि की पत्नी मधुमणि नेपाल भाग गई और कई दिनों तक सीबीआई उसकी तलाश करती रही। इसी तरह मधुमिता का नौकर देशराज भी कई दिन तक फरार रहा। बाद में सीबीआई ने जाल बिछाकर उसे लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। देशराज ने अमरमणि और मधुमिता के रिश्तों के बारे में खुलासा किया तो पूरे मामले की पर्ते उधड़ती चली गई। जांच में सामने आया कि अमरमणि से मधुमिता के रिश्तों से नाराज होकर हत्या की साजिश मधुमणि ने रची थी।
विधायक रह चुके मंत्री के बेटे पर भी है पत्नी की हत्या का आरोप
अमरमणि के बेटे अमनमणि पर भी अपनी पत्नी सारा सिंह की हत्या का आरोप लगा था। इस प्रकरण की जांच भी सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच में सामने आया था कि सारा सिंह की मौत सड़क दुर्घटना में नहीं, बल्कि मोबाइल के चार्जर से गला घोंटकर अमनमणि ने की थी। सीबीआई ने अमनमणि के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल किया था। अमनमणि वर्ष 2017 में नौतनवा सीट से विधायक भी रह चुका है। उसके खिलाफ लखनऊ में अपहरण का एक मामला भी दर्ज हुआ था।
मधुमिता की बहन और सारा की मां करती रही संघर्ष,बाप-बेटे ने किए थे एक जैसे ही काण्ड.
अमरमणि और उसके कुनबे को राजनीतिक संरक्षण देने और जेल के बजाय अस्पताल में सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला कई सालों से लगातार संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री और आलाधिकारियों को पत्र लिखा और धरना-प्रदर्शन किया। इसी तरह अमनमणि की पत्नी सारा सिंह की मां सीमा सिंह की अपनी बेटी काे इंसाफ दिलाने की लड़ाई आज भी जारी है।लेकिन अब इस खबर को जानने के बाद उनके सारे अरमान दिल मे ही बेटी की तरह दफन हो गए होंगे।
अमरमणि गोरखपुर में दिया बीमारी का हवाला, जेल प्रशासन को पता नहीं,चाँदी की तरह कट रही थी सजा
अमरमणि को सजा होने के बाद वह खुद को बीमार बताकर यूपी आ गया और लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर में रहने लगा। कुछ दिन पहले जब देहरादून जेल प्रशासन से अमरमणि के बारे में सूचना मांगी गई, तो अधिकारियों ने उनके बारे में पता नहीं होने की बात कही और आनाकानी करके मामले को टालमटोल दिया। गोरखपुर में अमरमणि ने अधिकांश समय जेल के बजाय अस्पताल में ही गुजारा,जहाँ से वह पूर्वांचल के राजनीतिक हलचलों की खबर रखता था।


















