बलिया
बलिया जनपद में सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए वट सावित्री का पावन व्रत पूरे विधि-विधान के साथ रखा गया।

बलिया जनपद में सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए वट सावित्री का पावन व्रत पूरे विधि-विधान के साथ रखा गया। यह व्रत पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री और सत्यवान की अमर प्रेम कहानी पर आधारित है, जिन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और बुद्धिमत्ता के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस छीन लिए थे। तभी से पति की रक्षा के लिए यह व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।
वट वृक्ष का धार्मिक महत्व
इस विशेष दिन पर वट (बरगद) के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है। साथ ही, इसी पावन वृक्ष के नीचे यमराज ने सत्यवान को दोबारा जीवनदान दिया था, जिसके कारण इसे दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
धूमधाम से हुई पूजा-अर्चना
व्रत के अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक रूप से सोलह श्रृंगार किया और वट वृक्ष के पास एकत्रित हुईं। महिलाओं ने पेड़ की जड़ में जल, मौसमी फल और मिष्ठान अर्पित किए। इसके बाद वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर सुख-समृद्धि की कामना के साथ परिक्रमा की। पूजा के समापन पर महिलाओं ने एक साथ बैठकर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी और अपने परिवार के कल्याण की कामना की।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) May 16, 2026






















