महराजगंज : कुवैत से कडजा गांव पहुंचा युवक रामबेलास का शव, घर में मचा कोहराम; 25 सितंबर को था वतन वापसी का टिकट

ठूठीबारी

महराजगंज जनपद से रोजी-रोटी की तलाश में खाड़ी देश कुवैत गए ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कडजा निवासी 33 वर्षीय रामबेलास गुप्ता का पार्थिव शरीर आठवें दिन बुधवार की शाम जब उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो समूचा गांव शोक में डूब गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद से रोजी-रोटी की तलाश में खाड़ी देश कुवैत गए ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कडजा निवासी 33 वर्षीय रामबेलास गुप्ता का पार्थिव शरीर आठवें दिन बुधवार की शाम जब उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो समूचा गांव शोक में डूब गया। शव के दरवाजे पर पहुंचते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई और मृतक के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा।

मृतक के शोकाकुल पिता बहादुर गुप्ता ने बिलखते हुए बताया कि रामबेलास करीब डेढ़ वर्ष पूर्व परिवार के भरण-पोषण के लिए कुवैत के मजरा शहर गया था। वह परदेस में रहकर मेहनत-मजदूरी कर रहा था। परिजनों के मुताबिक, रामबेलास ने घर लौटने का पक्का मन बना लिया था और वतन वापसी के लिए हवाई टिकट भी करा लिया था। तय कार्यक्रम के अनुसार उसे 25 सितंबर को अपने घर पहुंचना था, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।

वतन वापसी से ठीक 10 दिन पहले, 15 सितंबर की दोपहर कुवैत में अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां शाम करीब 3 बजे उसने अंतिम सांस ली। विदेश से विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मौत के आठवें दिन बुधवार शाम जैसे ही तिरंगे और ताबूत में उसका शव गांव पहुंचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

रामबेलास अपने पीछे 15 वर्षीय बेटे किशन, 5 वर्षीय नन्ही बेटी आराध्या और पत्नी सुमन गुप्ता को बिलखता छोड़ गया है। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाने और असमय उजड़े सुहाग से पत्नी सुमन बदहवास हैं। इस हृदयविदारक हादसे से हर आंख नम हो गई और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

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