लखनऊ

उत्तर प्रदेश को देश में खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने और इस क्षेत्र को संगठित रूप देने के लिए योगी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश को देश में खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने और इस क्षेत्र को संगठित रूप देने के लिए योगी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की पहली ‘उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025’ को मंजूरी दे दी गई। यह नीति अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी। सरकार के इस कदम से जहां वैश्विक बाजार और खिलौना उद्योग में चीन के दबदबे को सीधी चुनौती मिलेगी, वहीं राज्य में स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
जमीन खरीद और पूंजी निवेश पर भारी छूट
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नीति के तहत बड़ी खिलौना विनिर्माण इकाइयों (एंकर परियोजनाओं) को संयंत्र, मशीनरी और जमीन पर आकर्षक सब्सिडी दी जाएगी:
जमीन पर सब्सिडी: एंकर परियोजनाओं के लिए बुंदेलखंड और पूर्वांचल में सर्वाधिक 40 प्रतिशत जमीन सब्सिडी मिलेगी। मध्यांचल में 30 प्रतिशत और पश्चिमांचल (गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद को छोड़कर) में 20 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है।
पूंजी सब्सिडी: गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 20 प्रतिशत (अधिकतम 20 करोड़ रुपये) तथा प्रदेश के अन्य हिस्सों में 25 प्रतिशत (अधिकतम 35 करोड़ रुपये) पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी।
पात्रता की शर्तें: इस लाभ के लिए न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का स्थायी पूंजी निवेश, प्रति 1 करोड़ निवेश पर 20 रोजगार का सृजन या विदेशी खिलौना निर्माता के साथ संयुक्त उद्यम (JV) की शर्त पूरी करनी होगी।
पर्यावरण अनुकूल खिलौनों को विशेष प्रोत्साहन
नीति में पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) खिलौनों को बढ़ावा देने के लिए खास रियायतें दी गई हैं। 100 प्रतिशत बायोप्लास्टिक या बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक से खिलौने बनाने वाली इकाइयों को 10 वर्षों तक इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में पूरी छूट और प्रति यूनिट 3.2 रुपये तक पावर टैरिफ सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा घरेलू पेटेंट लागत का 75 प्रतिशत (अधिकतम 5 लाख रुपये) और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी।
पारंपरिक और आधुनिक क्लस्टर होंगे विकसित
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि सरकार का फोकस केवल फैक्ट्रियां लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, रिसर्च, टेस्टिंग, स्किलिंग और एक्सपोर्ट का पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है। नीति के तहत पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक निर्माण को ध्यान में रखते हुए शहरों को जिम्मेदारी दी गई है।
झांसी: सॉफ्ट टॉयज केंद्र के रूप में,वाराणसी: लकड़ी के खिलौनों के पारंपरिक केंद्र के रूप में,गोरखपुर: टेराकोटा खिलौनों के केंद्र के रूप में,नोएडा: आधुनिक खिलौना विनिर्माण के मुख्य हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) September 16, 2026












