महराजगंज:फरेंदा CHC से गायब नवजात बच्ची गोरखपुर से सुरक्षित बरामद; मां ने ही चुपके से रिश्तेदार को सौंपी थी मासूम, अस्पताल के बंद CCTV पर उठे सवाल

फरेंदा/महराजगंज

महराजगंज जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरेंदा से बीते 13 जुलाई को नवजात बच्ची के अचानक गायब होने के मामले में पुलिस ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरेंदा से बीते 13 जुलाई को नवजात बच्ची के अचानक गायब होने के हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है। फरेंदा पुलिस और स्वाट टीम ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हुए महज कुछ ही घंटों के भीतर गायब मासूम बच्ची को पड़ोसी जनपद गोरखपुर से पूरी तरह सुरक्षित बरामद कर लिया है। पुलिस जांच में जो हकीकत सामने आई है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है बच्ची का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि उसकी सगी मां ने ही उसे अपने एक रिश्तेदार को सौंप दिया था।

पुलिस की गहन पड़ताल में यह बात सामने आई है कि फरेंदा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम अगया की रहने वाली उषा (पत्नी स्वर्गीय दुर्गेश) ने प्रसव के बाद सीएचसी फरेंदा में अपनी नवजात बच्ची को जन्म दिया था। इसके बाद उसने चुपके से अपनी इस नवजात बेटी को अपने ही एक रिश्तेदार के हवाले कर दिया। रिश्तेदार नवजात को लेकर तत्काल गोरखपुर चला गया, जिसके बाद अस्पताल में बच्ची न मिलने पर हड़कंप मच गया था।

पूछताछ में मां ने अपनी बेबसी, घोर गरीबी और लाचारी का हवाला देते हुए बताया कि उसने बिना किसी कानूनी औपचारिकता के अपनी मर्जी से बच्ची को रिश्तेदार को सौंपा था। हालांकि, बिना शासकीय सूचना के इस तरह नवजात को किसी अन्य को सौंपना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

इस संवेदनशील घटना ने फरेंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पूरी तरह से पोल खोल कर रख दी है। प्रसव वार्ड जैसे अति-संवेदनशील स्थान से एक नवजात बच्ची बाहर चली गई और ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को भनक तक नहीं लगी।

सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से बंद पड़े थे। यदि जागरूक नागरिकों या पुलिस को तुरंत फुटेज देखनी होती, तो कोई सुराग नहीं मिल पाता। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की निगरानी में बरती गई इस घोर लापरवाही को लेकर स्थानीय जनता में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।

बिना बाल कल्याण समिति की अनुमति के बच्चा देना संगीन अपराध: प्रशासन

पुलिस प्रशासन और बाल विकास विभाग के आला अधिकारियों ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी नवजात शिशु को गोद लेने या देने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित ‘बाल कल्याण समिति’ और सक्षम न्यायालय की विधिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। बिना कानूनी सूचना के इस तरह बच्चा हस्तांतरित करना कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। पुलिस ने बरामदगी के बाद मां और संबंधित रिश्तेदार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही, जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएचसी फरेंदा में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने और बंद पड़े सभी सीसीटीवी कैमरों को 24 घंटे के भीतर चालू करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

 

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