हापुड़
हापुड़ उत्तर प्रदेश के स्टांप वेंडरों और अधिकृत संग्रह केंद्र संचालकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शासनादेश संख्या 2523 दिनांक 4 जून में तत्काल संशोधन करने की मांग की है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

हापुड़ उत्तर प्रदेश के स्टांप वेंडरों और अधिकृत संग्रह केंद्र संचालकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शासनादेश संख्या 2523 दिनांक 4 जून में तत्काल संशोधन करने की मांग की है। वेंडरों का दावा है कि यदि यह नई व्यवस्था लागू होती है, तो प्रदेश के करीब 20 हजार स्टांप वेंडर और एसीसी संचालक बेरोजगारी के कगार पर पहुंच जाएंगे, जिससे उनसे जुड़े लगभग एक लाख लोगों की आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में स्टांप वेंडरों ने अपनी व्यावहारिक समस्याओं को उजागर करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रत्येक स्टांप जारी करने पर स्टेशनरी, प्रिंटर, बिजली और अन्य तकनीकी खर्च उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है। इससे उन्हें प्रति स्टांप आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा, वर्ष 2019 से बड़ी संख्या में प्रपत्र संख्या-3 का रिकॉर्ड भी उन्हीं के पास जमा है, जबकि नियमानुसार इस रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संबंधित नोडल एजेंसी की होनी चाहिए।
छोटे स्टांप पर प्रपत्र संख्या-3 हटाने की मांग
ज्ञापन में कहा गया है कि कम मूल्य के स्टांप जारी करने में भी प्रपत्र संख्या-3 भरने की अनिवार्यता लागू है, जिससे समय और कागज दोनों की भारी बर्बादी हो रही है। स्टांप वेंडरों ने मांग की है कि 500 रुपये तक के स्टांप पर इस जटिल व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
स्टांप वेंडरों की 6 प्रमुख मांगें
स्टांप वेंडरों ने अपनी आजीविका को बचाने के लिए सरकार के समक्ष छह सूत्रीय मांगें रखी हैं:
स्टांप बिक्री पर होने वाले स्टेशनरी व अन्य खर्चों का सरकार द्वारा भुगतान कराया जाए।
छोटे मूल्य के स्टांप की बिक्री के लिए पुरानी व सरल व्यवस्था को बहाल किया जाए।
स्टांपिंग से जुड़ी भविष्य की नीतियों के निर्माण में वेंडरों की भागीदारी सुनिश्चित हो।
स्टांप वेंडर कल्याण कानून का गठन किया जाए।
लोकसेवक का दर्जा देते हुए वेंडरों को बीमा, चिकित्सा और अन्य जरूरी सरकारी सुविधाएं दी जाएं।
सभी मूल्य वर्ग के स्टांप के प्रिंट आउट के लिए पूर्व की भांति रंगीन कागज उपलब्ध कराया जाए।
ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व फैसले का हवाला देते हुए अनुरोध किया गया है कि नई ई-पंजीकरण व्यवस्था में एसीसी संचालकों को अधिकृत संस्था के रूप में समायोजित किया जाए। साथ ही, 4 जून 2026 के शासनादेश के क्रियान्वयन पर तुरंत रोक लगाकर यथास्थिति बनाए रखी जाए, ताकि हजारों परिवारों को भुखमरी से बचाया जा सके।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 3, 2026













