लखीमपुर खीरी: गंगापुरवा की बदहाली; घुटनों तक कीचड़ में डूबा गांव, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

लखीमपुर खीरी

लखीमपुर खीरी जनपद के पलिया ब्लॉक क्षेत्र से विकास के दावों की पोल खोलती एक बेहद हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

लखीमपुर खीरी जनपद के पलिया ब्लॉक क्षेत्र से विकास के दावों की पोल खोलती एक बेहद हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ की ग्राम पंचायत कोठिया के अंतर्गत आने वाले गांव ‘गंगापुरवा’ की बदहाली का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में गांव की मुख्य सड़कें पूरी तरह जलमग्न और घुटनों तक कीचड़ व दलदल में तब्दील नजर आ रही हैं।

नाली और खड़ंजा न होने से गांव बना टापू, घरों में कैद हुए लोग

वीडियो के साक्ष्यों के मुताबिक, गांव के भीतर जल निकासी के लिए नाली और आवागमन के लिए खड़ंजे की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। इसके चलते बरसात का पानी सड़कों पर ही जमा होकर गहरे दलदल का रूप ले चुका है। इस नारकीय स्थिति के कारण स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग, मरीज और गर्भवती महिलाएं अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

एंबुलेंस तक का आना मुश्किल, किसानों की बढ़ी आफत

सड़कों की इस बदहाली का खामियाजा गांव के अन्नदाताओं को भी भुगतना पड़ रहा है। किसानों को अपने खेतों से मंडी तक उपज पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे डरावनी स्थिति आपातकालीन समय में होती है, जब सड़कों पर गहरे कीचड़ के कारण एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं भी गांव के भीतर नहीं पहुंच पाती हैं।

कागजों पर विकास, जमीन पर विनाश; ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि बरसात शुरू होने के बाद से ही वे इन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा

शासन-प्रशासन द्वारा कागजों पर दिखाए जाने वाले विकास कार्य जमीनी स्तर पर पूरी तरह गायब हैं। हर साल बरसात के मौसम में गांव की यही दुर्दशा होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। केवल आश्वासनों की घुट्टी पिलाई जाती है।

डिजिटल साक्ष्य के बाद अब प्रशासन की परीक्षा

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल जिला और ब्लॉक स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही पर खड़ा हो गया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस पुख्ता डिजिटल साक्ष्य के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागेंगे, तत्काल स्थलीय निरीक्षण करेंगे और जलभराव से मुक्ति के लिए युद्ध स्तर पर कार्य शुरू कराएंगे।

स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि इस बार भी मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की गई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों की पुरजोर मांग है कि गांव में प्राथमिकता के आधार पर अविलंब नाली और खड़ंजे का निर्माण कराया जाए।

 

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