बुलंदशहर में प्राकृतिक खेती कार्यशाला का भव्य आयोजन,भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष ठाकुर शिवकुमार का मंत्री ने प्रशस्ति पत्र से किया सम्मानित

बुलंदशहर

बुलंदशहर जनपद कृषि विज्ञान केंद्र, बुलंदशहर के प्रांगण में आज शुक्रवार को प्राकृतिक खेती को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद कृषि विज्ञान केंद्र, बुलंदशहर के प्रांगण में आज शुक्रवार को प्राकृतिक खेती को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर किसानों की लागत कम करना और उनकी आय दोगुनी करने के लक्ष्य को साकार करना रहा।

किसान नेता का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष ठाकुर शिवकुमार को प्राकृतिक खेती एवं बागवानी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रभारी मंत्री सुरेंद्र सिंह दिलेर व जिलाधिकारी हर्ष कुमार के हाथों प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। मंच से अधिकारियों ने कहा कि ठाकुर शिवकुमार ने विशेष रूप से आम के बागवानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और उनके निराकरण के लिए प्रशासन व सरकार के बीच सेतु का काम किया है। उनकी पहल पर ही जिले में कई जगह प्राकृतिक खेती के मॉडल फार्म विकसित किए जा रहे हैं।

ये रहे मुख्य अतिथि

कार्यशाला में बुलंदशहर के प्रभारी मंत्री सुरेंद्र सिंह दिलेर ने बतौर मुख्य अतिथि किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि “धरती को जहर मुक्त बनाना ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी सौगात होगी। जिलाधिकारी हर्ष कुमार ने जिले में चल रही प्राकृतिक खेती योजनाओं की प्रगति साझा की।

मंच पर सिकंदराबाद विधायक लक्ष्मीराज सिंह, सदर विधायक प्रदीप चौधरी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश कुमार, जिला कृषि रक्षा अधिकारी योगेंद्र नाजिर तथा ऊंचागांव उद्यान विभाग के इंस्पेक्टर रनवीर सिंह सहित कृषि, उद्यान व सहकारिता विभाग के तमाम अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में प्राकृतिक खेती को समय की मांग बताया।

क्या हुआ कार्यशाला में

विशेषज्ञों ने जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत बनाने की विधि का लाइव डेमो दिया। साथ ही मल्चिंग, सहफसली खेती और देसी गौ-आधारित खेती से लागत कैसे आधी होती है, यह आंकड़ों सहित समझाया। किसानों को बताया गया कि प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, पानी की बचत होती है और उत्पाद को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।

हजारों किसानों की भागीदारी

कार्यशाला में बुलंदशहर तहसील के अलावा सिकंदराबाद, शिकारपुर, खुर्जा और अनूपशहर से आए करीब तीन हजार से अधिक किसान शामिल हुए। किसानों ने गौ-आधारित खेती के अनुभव साझा किए और अधिकारियों से सवाल-जवाब भी किए।

भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का एक ही लक्ष्य है  “लागत घटे, आमदनी बढ़े”। संघ आगे भी गांव-गांव जाकर प्राकृतिक खेती के लिए जागरूकता अभियान चलाएगा।

कार्यक्रम का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किया और अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।

 

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