बेटा खोया, FIR पाई: सिद्धार्थनगर के पिपरहवा में परिजन पूछ रहे- कागजी कार्रवाई से मिलेगा न्याय?

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर जिले के मोहाना थाना क्षेत्र अंतर्गत पिपरहवा गांव की घटना, परिजनों में कोहराम, वरिष्ठ अधिकारियों ने किया घटनास्थल का निरीक्षण, तहरीर पर मुकदमा दर्ज, रटी रटाई पुलिसिया बयान जारी, पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

जनपद सिद्धार्थनगर में नेपाल सीमा से सटे मोहाना थाना क्षेत्र अंतर्गत पिपरहवा गांव से बुधवार सुबह एक सनसनीखेज मामला सामने आया। यहां 19 वर्षीय युवक मुकेश का शव उसके घर की छत पर संदिग्ध परिस्थितियों में खून से लथपथ मिला।

सूचना मिला, घटनास्थल पर पुलिस पहुंची, और रटी रटाई प्रक्रिया हो गई शुरू

उक्त घटनाक्रम से परिजनों का कलेजा सहम गया, जब परिजनों ने हत्या की बात कही तो लोग हैरान थे कि इतनी बड़ी वारदात और घर पर ही। आखिर कैसे? क्या अब घर पर भी लोग सुरक्षित नही?
जब इतनी बड़ी वारदात की भनक पुलिस को लगी तो पुलिस भी फाइलों के साथ घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने मामले को बारीकी से जांचा-परखा, पंचायतनामा कराया,शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। नियमानुसार, वारदात संबंधित तथ्यों से फाइल भरी गई और बाद में आधिकारिक बयान जारी हुआ कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

परिजनों का आरोप है कि बेटे की हत्या हुई है। अब सवाल यह है कि पुलिस की अग्रिम विधिक कार्रवाई इतनी ही प्रभावशाली होती तो क्या ऐसी घटना को कारित करने वाला बिना कुछ सोचे-समझे इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे देता? जिले भर में लगातार शांति व्यवस्था बनाए रखने को लेकर आला अधिकारियों की बैठक होती है, लेकिन परिणाम कुछ इस कि सोचने पर मजबूर कर दे। अब ये समझ नहीं आ रहा है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजित उस बैठक में आखिर चर्चा किस बात पर होती है? क्योंकि इतने बड़े वारदात से साफ तौर पर जाहिर होता है कि शांति व्यवस्था केवल उस बैठक के उन दफ्तरों में ही है। जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
सिद्धार्थनगर एक ऐसा जिला,जो संगीन अपराधों के बजाय शांति के लिए प्रसिद्ध हुआ करता था, लेकिन आए दिन कुछ ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं कि शांति व्यवस्था में खलल डाल रही है।

मुकदमा दर्ज, सवाल बरकरार

इस वारदात से आसपास के लोग सहमे हुए हैं और दबे आवाज में पुलिस और पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं कि “क्या सिर्फ मुकदमा लिख देना, फाइल बनाकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना ही ‘विधिक कार्रवाई’ की पूरी परिभाषा है?” परिजनों के आरोप के मुताबिक, नेपाल सीमा से सटे इस संवेदनशील इलाके में एक युवक की हत्या हो जाती है और सिस्टम का जवाब सिर्फ रूटीन प्रक्रिया तक सीमित रह जाता है। क्या यही है अग्रिम विधिक कार्रवाई?

हत्यारों तक पहुंचने का रोडमैप क्या है? रात की गश्त, इंटेलिजेंस इनपुट, फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वायड – ये सब कब एक्टिव होंगे या सिर्फ ‘जांच जारी है’ के बोर्ड के पीछे छुपे रहेंगे?

मुकदमा दर्ज करना पुलिस की ड्यूटी का पहला पन्ना है, आखिरी नहीं।
पीड़ित परिजन पूछ रहे हैं – इस फाइल में इंसाफ की तारीख कब लिखी जाएगी?

 

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