बुलंदशहर:अनूपशहर में धूमधाम से मनाया गया गुरु हरिराय साहब का विवाहोत्सव, निकला भव्य नगर कीर्तन

अनूपशहर

बुलंदशहर जनपद के अनूपशहर मोहल्ला मदारगेट स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा सातवीं पातशाही में बुधवार को सातवें सिख गुरु, श्री गुरु हरिराय साहब का विवाहोत्सव पारंपरिक श्रद्धा और अभूतपूर्व उल्लास के साथ मनाया गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद के अनूपशहर मोहल्ला मदारगेट स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा सातवीं पातशाही में बुधवार को सातवें सिख गुरु, श्री गुरु हरिराय साहब का विवाहोत्सव पारंपरिक श्रद्धा और अभूतपूर्व उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर पंज प्यारों की अगुवाई में एक विशाल एवं भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में सिख समाज और स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

जून 1640 में हुआ था गुरुजी का विवाह

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, सातवें गुरु श्री हरिराय साहब का विवाह जून 1640 ईस्वी (आषाढ़ शुदी तीन, संवत 1697 विक्रमी) में अनूपशहर की निवासी माता किशन कौर जी के साथ हुआ था। जिस पवित्र स्थान पर यह विवाह संपन्न हुआ था, वहीं आज गुरुद्वारा सातवीं पातशाही सुशोभित है, जहां हर वर्ष इस ऐतिहासिक और धार्मिक उत्सव को बेहद भव्य रूप में मनाया जाता है।

नगर कीर्तन का हुआ भव्य स्वागत

विवाहोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित नगर कीर्तन की शुरुआत ग्राम खुदादिया से हुई। इस दौरान फूलों से सजी पालकी साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सुशोभित कर श्रद्धापूर्वक चंवर साहिब झुलाया जा रहा था। यह नगर कीर्तन भीमपुर दोराहा, अमरपुर, राजौर, रूपवास और अचलपुर होते हुए अनूपशहर गुरुद्वारे पर आकर संपन्न हुआ। पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर पालकी साहिब पर पुष्प वर्षा की और जोरदार स्वागत किया।

शौर्य प्रदर्शन और भजन-कीर्तन

जुलूस के दौरान जहां एक ओर रागी जत्थों द्वारा गाए जा रहे शबद-कीर्तन से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा, वहीं दूसरी ओर अखाड़ों के जांबाज युवाओं ने हैरतअंगेज शौर्य का प्रदर्शन किया। युवाओं ने तलवारबाजी, बनैती और मुदगर चलाकर अपनी युद्ध कला का परिचय दिया। इस धार्मिक समागम में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों सहित हर वर्ग के लोगों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया, जिससे संपूर्ण क्षेत्र गुरु महाराज के जयकारों से गुंजायमान रहा।

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