बलिया के किसानों ने पेश की मिसाल, 1130 घरों में हो रहा गौवंश का पालन, सरकार दे रही आर्थिक मदद

बलिया

बलिया जनपद में उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के उपाध्यक्ष मा. महेश कुमार शुक्ला और सदस्य दीपक गोयल ने बलिया के किसानों की गौ-सेवा के प्रति निष्ठा की जमकर सराहना की है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बलिया जनपद में उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के उपाध्यक्ष मा. महेश कुमार शुक्ला और सदस्य दीपक गोयल ने बलिया के किसानों की गौ-सेवा के प्रति निष्ठा की जमकर सराहना की है। लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने जिले में गौवंश संरक्षण की वर्तमान स्थिति और सरकार की लाभकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

घरों में गौ-पालन पर जोर ₹1500 प्रति माह की सहायता

उपाध्यक्ष महोदय ने कहा कि गौमाता का असली स्थान केवल गौशालाएं नहीं, बल्कि किसानों के घर हैं। सरकार की योजना के तहत:

सहभागिता योजना: कोई भी इच्छुक किसान या गौ-सेवक सरकारी गौशालाओं से गौमाता को अपने घर ले जा सकता है।

पात्रता: एक व्यक्ति अपने पहचान पत्र (आधार कार्ड आदि) के माध्यम से अधिकतम चार गौवंश गोद ले सकता है।

आर्थिक मदद: प्रत्येक गौवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार ₹1500 प्रति माह की धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजती है।

बलिया जनपद के आंकड़े: एक नज़र में

प्रेसवार्ता में जिले और प्रदेश के उत्साहजनक आंकड़े साझा किए गए।

जिले में कुल गौशालाएं: 30

कुल संरक्षित गौवंश: 2295

घरों में संरक्षित गौवंश: 1130 (किसानों और सेवकों के पास)

प्रदेश स्तर पर: उत्तर प्रदेश में कुल 7700 से अधिक गौशालाएं हैं, जिनमें लगभग 16 लाख गौवंश संरक्षित हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देशों पर सख्त निगरानी

शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में पूरे प्रदेश में गौशालाओं के नियमित निरीक्षण के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। प्रशासन का लक्ष्य न केवल गौवंश का संरक्षण करना है, बल्कि सरकार की इन योजनाओं की जानकारी हर ग्रामीण तक पहुँचाना है ताकि अधिक से अधिक किसान इस अभियान से जुड़ सकें।

इस पहल से न केवल निराश्रित गौवंश को सहारा मिल रहा है, बल्कि किसानों को उनके पालन-पोषण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर भी बनाया जा रहा है।

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