बुलंदशहर
बुलंदशहर जनपद के सनातन परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह दिव्य प्रकाश है पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद के सनातन परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वह दिव्य प्रकाश है जो अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। यह उद्गार सुप्रसिद्ध भागवत वक्ता आचार्य मनीष कौशिक (वृंदावन) ने जहांगीराबाद में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन व्यक्त किए।
प्रकृति के २४ गुरुओं का प्रसंग: धैर्य और शुद्धता का संदेश
व्यासपीठ से कथा का रसपान कराते हुए आचार्य मनीष कौशिक ने भगवान दत्तात्रेय के २४ गुरुओं के प्रसंग को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य के भीतर सीखने की जिज्ञासा हो, तो प्रकृति का हर अंश उसे शिक्षा दे सकता है।
पृथ्वी हमें धैर्य सिखाती है।
जल से हमें मन की शुद्धता का ज्ञान मिलता है।
सूर्य हमें बिना रुके निरंतर कर्मशील रहने की प्रेरणा देता है।
नारों से नहीं, आचरण से होगी हिंदुत्व की रक्षा
धर्म की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने कहा कि हिंदुत्व और सनातन धर्म की रक्षा केवल नारों से संभव नहीं है। इसके लिए हमें धर्म के वास्तविक आचरण और अपनी प्राचीन वैज्ञानिक जीवनशैली को अपनाना होगा। उन्होंने भक्तों को जीवन में ‘तीन संकल्प’ उतारने का आह्वान किया:
गंगा जैसी मन की निर्मलता।
गायत्री जैसी सात्विक और शुद्ध बुद्धि।
गुरु का अटूट मार्गदर्शन।
विदाई पर झूम उठे श्रद्धालु, गणमान्य लोगों ने लिया आशीर्वाद
कथा के विश्राम अवसर पर भव्य संकीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात समाजसेवी शिवा विजय ने आचार्य का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में गौरव बंसल, मोहित अग्रवाल, सौरभ विरदी, जीतू वर्मा और गौरव सिसौदिया सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्यों का विशेष योगदान रहा। अंतिम दिन बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने आरती के बाद प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) April 9, 2026























