सिद्धार्थनगर:सड़क सुरक्षा के ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनेंगे 1 लाख छात्र सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की अनूठी पहल, 270 कॉलेजों में बने रोड सेफ्टी क्लब

कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर)

सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात नियमों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के लिए सिद्धार्थ विश्वविद्यालय,कपिलवस्तु ने एक विशाल अभियान का शंखनाद किया है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात नियमों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के लिए सिद्धार्थ विश्वविद्यालय,कपिलवस्तु ने एक विशाल अभियान का शंखनाद किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने से संबद्ध चार जिलों के 270 से अधिक महाविद्यालयों के करीब एक लाख छात्र-छात्राओं को सड़क सुरक्षा का ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनाने का निर्णय लिया है।

भाषण नहीं, धरातल पर उतरेगा अभियान

विश्वविद्यालय की यह पहल केवल औपचारिक भाषणों तक सीमित नहीं रहेगी। इसके लिए एक व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की गई है:

रोड सेफ्टी क्लब का गठन सभी 270 महाविद्यालयों में अनिवार्य रूप से रोड सेफ्टी क्लब बनाए गए हैं।

पीयर लर्निंग प्रशिक्षित छात्र पहले अपने सहपाठियों को यातायात नियमों की बारीकियां सिखाएंगे।

सड़क पर जागरूकता युवा छात्र सड़कों पर उतरकर आम जनता को हेलमेट की अनिवार्यता, सीट बेल्ट, ओवर स्पीडिंग और ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ के खतरों के प्रति जागरूक करेंगे।

गांव-शहर तक पहुंचेगा संदेश

विश्वविद्यालय का मानना है कि युवाओं की ऊर्जा और उनकी बात समाज पर अधिक प्रभाव डालती है। रोड सेफ्टी क्लब के माध्यम से रैलियों और नुक्कड़ नाटकों का आयोजन होगा।पोस्टर प्रतियोगिता और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए संदेश प्रसारित किया जाएगा।

युवा स्वयं नियमों का पालन कर समाज के लिए रोल मॉडल बनेंगे।

“जिंदगियां बचाना हमारा उद्देश्य” – कुलसचिव
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार ने इस पहल पर जोर देते हुए कहा

“अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं जानकारी के अभाव और मामूली लापरवाही के कारण होती हैं। यदि हमारे युवा समय रहते अनुशासन और सतर्कता सीख लें, तो हजारों परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता है। इसी लक्ष्य के साथ हमने सभी संबद्ध कॉलेजों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं।”

सड़क संस्कृति में बदलाव की उम्मीद

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का यह प्रयोग न केवल छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनाएगा, बल्कि सिद्धार्थनगर और आसपास के जिलों में ‘सड़क संस्कृति’ में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा, तो क्षेत्र में सड़क हादसों की संख्या में भारी कमी देखने को मिलेगी।

 

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