बांग्लादेश में शोक की लहर: पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन

 

बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन और देश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का मंगलवार तड़के ढाका के एवरकेयर अस्पताल में निधन हो गया।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बांग्लादेश की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन और देश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का मंगलवार तड़के ढाका के एवरकेयर अस्पताल में निधन हो गया। 80 वर्षीय खालिदा जिया लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं।

फज्र की नमाज के बाद ली अंतिम सांस

पारिवारिक सूत्रों और बीएनपी (BNP) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बेगम जिया का निधन मंगलवार तड़के फज्र की नमाज के बाद हुआ। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई और अस्पताल के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ जमा होने लगी।

स्वास्थ्य समस्याओं से थीं गंभीर रूप से पीड़ित

बेगम खालिदा जिया पिछले काफी समय से वेंटिलेटर और डॉक्टरों की सघन निगरानी में थीं। वह बहु-अंग जटिलताओं (Multi-organ complications) से पीड़ित थीं,
फेफड़ों का संक्रमण और किडनी से जुड़ी समस्याएं। हाल के महीनों में उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी, जिसके कारण उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

ऐतिहासिक राजनीतिक सफर: देश की पहली महिला प्रधानमंत्री

खालिदा जिया का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उनके करियर की कुछ प्रमुख उपलब्धियां:

पहली महिला पीएम: वह बांग्लादेश की कमान संभालने वाली पहली महिला प्रधानमंत्री थीं।

दो बार कार्यकाल: उन्होंने 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 तक देश की सेवा की।

मुस्लिम जगत में स्थान: बेनजीर भुट्टो के बाद वह मुस्लिम दुनिया की दूसरी महिला प्रधानमंत्री बनीं, जो दक्षिण एशियाई राजनीति में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर था।

परिवार और पार्टी में शोक

उनके निधन के समय उनके बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान व परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। तारिक रहमान हाल ही में विदेश से अपनी मां की देखभाल के लिए वापस लौटे थे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके निधन को देश के लोकतंत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।

अंतिम संस्कार की तैयारी

बीएनपी की ओर से जल्द ही उनके अंतिम संस्कार और शोक सभाओं के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। ढाका सहित पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि उनके अंतिम दर्शन के दौरान स्थिति नियंत्रित रहे।

 

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