भारतीय परमाणु कार्यक्रम के पूर्व प्रमुख सलाहकार डॉ. राजगोपाल चिदंबरम का निधन

ब्यूरो रिपोर्ट

डॉ. राजगोपाल चिदंबरम, जो भारतीय परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख वास्तुकारों में से एक थे, का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनका निधन शनिवार तड़के 3.20 बजे मुंबई के जसलोक अस्पताल में हुआ। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा, खासकर पोखरण परमाणु परीक्षणों में उनकी अहम भूमिका के लिए। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. चिदंबरम का योगदान भारतीय वैज्ञानिक और सामरिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने में अत्यंत महत्वपूर्ण था और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।डॉ. चिदंबरम का जन्म 11 नवंबर, 1936 को चेन्नई में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा और प्रशिक्षण भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बैंगलोर और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से प्राप्त किया।

परमाणु कार्यक्रम में योगदान
डॉ. चिदंबरम भारतीय परमाणु कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण सदस्य थे। वह 1974 के पोखरण-1 परमाणु परीक्षण और 1998 के पोखरण-2 परीक्षणों के मुख्य वास्तुकार थे। उनका योगदान भारतीय रक्षा और सामरिक कार्यक्रम के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण था। पोखरण-1 (1974) भारत का पहला परमाणु परीक्षण था, जिसे “Smiling Buddha” के नाम से जाना जाता है। इसके बाद पोखरण-2 (1998) परीक्षणों के सफल संचालन में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई, जिसने भारत को एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया।

प्रमुख पदों पर कार्य

डॉ. चिदंबरम ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के निदेशक, परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल में भारतीय परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान मिली।

सम्मान और पुरस्कार

उनके योगदान के लिए उन्हें 1975 और 1999 में पद्म श्री और पद्म विभूषण जैसे सम्मान प्राप्त हुए थे। इन पुरस्कारों ने उनके समर्पण और कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा।

अंतरराष्ट्रीय योगदान

डॉ. चिदंबरम ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया, जहां उन्होंने वैश्विक परमाणु ऊर्जा नीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।

डॉ. चिदंबरम के योगदान की गहराई

डॉ. चिदंबरम ने अपनी जिंदगी का अधिकांश समय भारतीय परमाणु कार्यक्रम को सफल बनाने में समर्पित किया। उनका यह कार्य देश की रक्षा क्षमता को एक नई दिशा देने के साथ-साथ भारत को एक आत्मनिर्भर परमाणु शक्ति बनाने में सहायक था। पोखरण-2 परीक्षणों के बाद भारत ने परमाणु शक्ति के रूप में एक बड़ी जगह बनाई, और डॉ. चिदंबरम का योगदान इस सफर के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में उभरकर सामने आया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. चिदंबरम के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “डॉ. चिदंबरम के निधन से हमें बहुत दुख हुआ। वे भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख वास्तुकारों में से एक थे और उन्होंने भारत की वैज्ञानिक और सामरिक क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें पूरा देश कृतज्ञता के साथ याद करेगा और उनके प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे।”

 

डॉ. चिदंबरम के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा और उनकी विरासत भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अमिट रहेगी।

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