महाराजगंज
जनपद महराजगंज के निचलौल-ढेसो मार्ग पर गड्ढे नहीं “तालाब” हैं। टैक्स, उद्घाटन, भाषण सब समय पर। बस सड़क बनना बाकी है। क्या है पूरा मामला? पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की पूरी रिपोर्ट

“डिजिटल इंडिया”, “स्मार्ट सिटी”, “शिक्षा सर्वोपरि” – ये नारे पोस्टर पर बहुत अच्छे लगते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत देखने के लिए महाराजगंज के निचलौल-ढेसो मार्ग वाले जंगल के रास्ते पर आ जाइए।
यहां स्कूली बच्चों ने मंगलवार को वो कर दिखाया जो PWD, विधायक और सांसद पिछले 5 साल से नहीं कर पाए। बदहाल सड़क से तंग आकर बच्चे खुद सड़क पर उतर आए और पूछा – अब कैसे जाएं स्कूल?
तस्वीरें चीख-चीख कर बता रही हैं कि विकास यहां साइकिल के पहिए में फंसकर रह गया है। एक तरफ बच्चे कीचड़ में साइकिल धकेल रहे हैं, दूसरी तरफ बाइक वाले जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं।
अब सवाल यह है कि जब हर बजट में “सड़क और शिक्षा” के लिए करोड़ों का ऐलान होता है, तो ये पैसा जाता कहां है? उद्घाटन के फीते काटने के लिए फूल माला समय पर पहुंच जाती है, लेकिन सड़क पर डामर क्यों नहीं पहुंचता?
प्रशासन शायद उसी दिन नींद से जागेगा जिस दिन किसी बच्चे के साथ कोई बड़ा हादसा हो जाएगा। तब जांच कमेटी बनेगी, मुआवजे का ऐलान होगा और फिर… फिर सब पहले जैसा।
फिलहाल बच्चों ने तय कर लिया है। अगर सरकार सड़क नहीं बनाएगी, तो वो अपनी आवाज से सड़क बनवाएंगे। क्योंकि पढ़ाई रुक सकती है, पर सवाल नहीं।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 25, 2026













