बांसडीह
बलिया जनपद के घाघरा नदी के बढ़ते जलस्तर और तटीय इलाकों में तेजी से हो रहे कटान की विभीषिका को थामने के लिए बलिया जिला प्रशासन पूरी तरह से युद्धस्तर पर उतर आया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बलिया जनपद के घाघरा नदी के बढ़ते जलस्तर और तटीय इलाकों में तेजी से हो रहे कटान की विभीषिका को थामने के लिए बलिया जिला प्रशासन पूरी तरह से युद्धस्तर पर उतर आया है। बुधवार को जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने स्थानीय भाजपा विधायिका केतकी सिंह के साथ तहसील बांसडीह के ग्राम चांदपुर एवं महाराजपुर का औचक स्थलीय निरीक्षण किया। डीएम ने बाढ़ खंड के अधिकारियों को दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि बचाव कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही या शिथिलता अक्षम्य होगी।
₹5 करोड़ की लागत और 17 कटरों से किलेबंदी, जलधारा मोड़ने की तैयारी
निरीक्षण के दौरान बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता ने जिलाधिकारी को तकनीकी तैयारियों की रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने बताया कि कटान को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 17 विशेष कटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें से प्रत्येक कटर की चौड़ाई 12 मीटर, ऊंचाई 4 मीटर और लंबाई 8 मीटर है। इसके साथ ही शासन द्वारा इन बाढ़ निरोधक कार्यों के लिए ₹5 करोड़ का बजट भी जारी कर दिया गया है।
नदी के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि घाघरा नदी की मुख्य जलधारा का रुख गांव से दूर मोड़ने के लिए तत्काल प्रभाव से ‘जिओट्यूब’ डालने की मुकम्मल व्यवस्था की जाए, ताकि कटान के खतरे को न्यूनतम किया जा सके।
जिलाधिकारी ने मौसम और जलस्तर के इनपुट साझा करते हुए बताया कि आने वाले दिनों में घाघरा नदी का जलस्तर लगभग दो मीटर तक और बढ़ने की प्रबल संभावना है। ऐसे में जलस्तर बढ़ने से पहले ही सभी सुरक्षात्मक कार्य शत-प्रतिशत पूरे कर लिए जाएं। डीएम के इस कड़े और संवेदनशील रुख से कटान के खौफ में जी रहे क्षेत्रीय ग्रामीणों में प्रशासनिक सक्रियता को लेकर एक नया भरोसा जगा है। निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड सहित जिला प्रशासन के तमाम आला अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 15, 2026













