महराजगंज : CHC फरेंदा में मानवता तार-तार! ग़रीबी के नाम पर नवजात को बेचा या सौंपा? अस्पताल को मिली लाश की झूठी खबर

महराजगंज

महराजगंज जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरेंदा में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरेंदा में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। यहां ग़रीबी और लाचारी का हवाला देकर परिजनों ने अपनी नवजात बच्ची को बिना किसी को बताए दूसरे के हाथों सौंप दिया। अस्पताल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।

क्या है पूरा मामला

मिली जानकारी के अनुसार,13 जुलाई को पुरन्दरपुर थाना क्षेत्र के अगया गांव निवासी ऊषा पत्नी दुर्गेश को उनके परिजन CHC फरेंदा में भर्ती कराया। आयुष्मान कार्ड के जरिए आपरेशन से ऊषा ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। अस्पताल अधीक्षक के मुताबिक डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ थे।

इसके बाद हुआ खेल। सीनियर सर्जन जब वार्ड में राउंड पर पहुंचीं तो 16 नंबर बेड खाली मिला। बच्ची गायब थी। पूछताछ में पहले मां ने बताया कि बच्ची की मौत हो गई। लेकिन नवजात के स्वस्थ होने की जानकारी से डॉक्टरों को शक हुआ। सख्ती से पूछने पर परिजनों ने सच उगला।

“खुशी से दे दिया बच्ची”

परिजनों ने बताया कि बेड नंबर 16 पर भर्ती एक अंजान महिला ने कहा था कि “अगर कोई अपना बच्चा देना चाहे तो बता देना, हम ले जाएंगे”। इसी बात पर यकीन कर परिजनों ने अपनी नवजात को उसे सौंप दिया। उनका तर्क था – “हम पालन-पोषण नहीं कर सकते। इसलिए दे दिया ताकि बच्ची की परवरिश और शादी-विवाह अच्छे से हो सके”।

टूटी हुई मजबूरी

परिजनों ने अपनी बदहाली भी बताई। उन्होंने कहा कि बच्ची के जन्म से पहले ही ऊषा के पति दुर्गेश का निधन हो चुका है। घर चलाने वाला कोई नहीं है। ऊषा 6 बहनें है। घर में 13 साल का एक छोटा भाई भी है।

अस्पताल अधीक्षक का बड़ा बयान

इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 को देते हुए CHC फरेंदा के अधीक्षक ने कहा कि मामले की सूचना विभाग के उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। परिजनों को बच्ची को वापस लाने के लिए अंतिम समय दिया गया है। अगर तय समय में बच्ची बरामद नहीं हुई तो प्रशासन को लिखित शिकायत देकर FIR दर्ज कराई जाएगी।

सवालों के घेरे में सिस्टम
अस्पताल परिसर से इस तरह नवजात का “हस्तांतरण” हो जाना कई सवाल खड़े करता है। ये सिर्फ ग़रीबी है, लाचारी है या नवजात तस्करी का कोई बड़ा रैकेट?
फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस मामले में जांच कर रही है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि जांच-पड़ताल में सच्चाई का कौन सा चेहरा सामने आता है? ग़रीबी, लाचारी या नवजात तस्करी?


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