महराजगंज: पत्नी की जगह पति संभाल रहे थे BLO का कार्य, जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

महराजगंज

महराजगंज जनपद के ग्राम पंचायत धरैची की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद के ग्राम पंचायत धरैची की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता विक्रम मद्धेशिया की शिकायत पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें प्रथम दृष्टया बीएलओ के पति को दोषी पाया गया है। इस खुलासे के बाद स्थानीय प्रशासनिक कार्यप्रणाली और मतदाता सूची की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत

शिकायतकर्ता विक्रम मद्धेशिया ने आरोप लगाया था कि गांव की मतदाता सूची से वैध मतदाताओं के नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से हटाए जा रहे हैं, जबकि पात्र लोगों के नाम जोड़े नहीं जा रहे। इसके अलावा भारी संख्या में नाबालिगों के नाम भी सूची में शामिल करने का आरोप था। शिकायत के बाद जांच टीम ने पंचायत भवन पहुंचकर मामले की गहन पड़ताल की।

जांच में शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार

शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए 23 पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़े गए।

बीएलओ के पति द्वारा 9 वैध मतदाताओं के नाम सूची से अवैध रूप से हटा दिए गए।

88 कथित नाबालिगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल होने की बात सामने आई, जिसके संबंध में जांच के दौरान कोई संतोषजनक साक्ष्य या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

45 ऐसी विवाहित महिलाओं के नाम भी सूची से नहीं हटाए गए, जिनकी शादी होकर वे दूसरे स्थान पर जा चुकी हैं।

सबसे बड़ा सवाल: पत्नी की जगह पति क्यों कर रहे थे सरकारी काम?

जांच रिपोर्ट का सबसे गंभीर और हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि सरकारी तौर पर नियुक्त बीएलओ श्रीमती पंकज पाण्डेय के बजाय उनके पति सुरेंद्र पाण्डेय द्वारा मतदाता सूची का पूरा कार्य किया जा रहा था। ग्रामवासियों और शिकायतकर्ता के बयानों के आधार पर रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि नियुक्त बीएलओ ने स्वयं फील्ड में कोई कार्य नहीं किया। उनके पति ने घर बैठे ही पूरी प्रक्रिया निपटा दी और नियम के विरुद्ध जाकर घर-घर जाकर कोई भौतिक सत्यापन भी नहीं किया गया।

तीन सदस्यीय जांच टीम ने अपनी आख्या में स्पष्ट रूप से लिखा है कि बीएलओ के पति द्वारा जानबूझकर ये गलतियां की गई हैं और प्रथम दृष्टया वही इस पूरी गड़बड़ी के दोषी हैं।

अब क्षेत्र में यह बड़ा सवाल गूंज रहा है कि जब नियमों के मुताबिक बीएलओ का कार्य केवल नियुक्त सरकारी कर्मचारी ही कर सकता है, तो किस अधिकार से एक बाहरी व्यक्ति सरकारी दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ कर रहा था? जांच रिपोर्ट आने के बाद अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार उच्चाधिकारी इस गंभीर लापरवाही और नियम उल्लंघन पर क्या दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

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