औरैया: अवैध प्रॉपर्टी कारोबार का “मायाजाल”; नियमों को धता बताकर बिना ‘रेरा’ पंजीकरण के हो रही करोड़ों की प्लाटिंग

औरैया

औरैया जनपद में उत्तर प्रदेश सरकार की भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावों के बीच औरैया जनपद में अवैध प्रॉपर्टी डीलिंग का कारोबार बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ न्यूज़ 24 की ख़ास रिपोर्ट।


औरैया जनपद में उत्तर प्रदेश सरकार की भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावों के बीच औरैया जनपद में अवैध प्रॉपर्टी डीलिंग का कारोबार बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा है। जिले की तीनों तहसीलों सदर, बिधूना और अजीतमल में नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी वैधानिक पंजीकरण के कृषि भूमि पर प्लॉट काटने का खेल खुलेआम जारी है।

केंद्र सरकार ने 1 मई 2017 से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) कानून लागू किया था। नियमानुसार, किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट या प्रॉपर्टी डीलर के लिए रेरा में पंजीकरण अनिवार्य है। बिना रजिस्ट्रेशन के विज्ञापन देना या प्लॉट बेचना कानूनन अपराध है।

हैरान करने वाले आंकड़े: सूत्रों का दावा है कि औरैया जनपद में लगभग 99 प्रतिशत प्रॉपर्टी डीलर बिना किसी पंजीकरण के करोड़ों रुपये का लेनदेन कर रहे हैं।

अवैध प्लाटिंग: जिले में जगह-जगह कृषि भूमि पर बिना नक्शा पास कराए और बिना प्रशासनिक अनुमति के बड़े-बड़े साइन बोर्ड लगाकर अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं।

सपनों के घर के नाम पर जनता से ‘धोखा

प्रॉपर्टी डीलर आम जनता को सस्ते प्लॉट और सर्वसुविधा युक्त आशियाने का सपना दिखाकर उन्हें ऐसी जमीनों पर निवेश करा रहे हैं, जिनका न तो लेआउट पास है और न ही भविष्य में वहां मूलभूत सुविधाएं मिलने की कोई गारंटी। सरकारी नियमों के मुताबिक, बिना पंजीकरण कारोबार करने पर प्रोजेक्ट लागत का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है, लेकिन संबंधित विभागों की सुस्ती ने इन अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद कर रखे हैं।

प्रशासनिक सख्ती और विरोध की सुगबुगाहट

हाल ही में सदर एसडीएम द्वारा अवैध प्लाटिंग के खिलाफ शुरू की गई सख्ती के बाद अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। चर्चा है कि कार्रवाई से घबराए कई तथाकथित प्रॉपर्टी डीलर अब संगठित होकर प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं ताकि उनके अवैध कारोबार पर आंच न आए।

बड़े सवाल और विभागीय चुप्पी

जनता के बीच यह सवाल कौंध रहा है कि आखिर वर्षों से बिना पंजीकरण यह अवैध धंधा किसकी शह पर चल रहा था? क्या जिम्मेदार विभाग इन अवैध कॉलोनियों से अनजान थे या फिर इन्हें मौन संरक्षण प्राप्त था?

यदि जिला प्रशासन निष्पक्षता से पूरे जनपद में रेरा पंजीकरण और प्लाटिंग की सघन जांच शुरू कर दे, तो करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ हो सकता है और कई रसूखदार प्रॉपर्टी डीलरों पर गाज गिरना तय है।

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