बुलंदशहर: बेमौसम बारिश से टूटी किसानों की कमर, अब मक्का की फसल बनी कन्हेरा के अन्नदाताओं की आखिरी उम्मीद

बुलंदशहर 

बुलंदशहर जनपद में प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे बुलंदशहर के दानपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कन्हेरा के किसानों के लिए अब मक्का की फसल ही जीवन का सहारा बची है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर  जनपद में प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे बुलंदशहर के दानपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कन्हेरा के किसानों के लिए अब मक्का की फसल ही जीवन का सहारा बची है। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने क्षेत्र के किसानों की आलू और गेहूं की तैयार फसलों को मटियामेट कर दिया है, जिससे किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं।

आलू और गेहूं की बर्बादी से आर्थिक संकट

कन्हेरा गांव के किसानों का कहना है कि उन्होंने खून-पसीना एक कर गेहूं और आलू की खेती की थी, लेकिन कुदरत के कहर ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।

बर्बाद हुई फसलें: बारिश के कारण आलू खेतों में ही सड़ गए और गेहूं की फसल बिछ जाने से उत्पादन में भारी गिरावट आई है।

बढ़ा कर्ज का बोझ: पहले से ही खाद और बीज के लिए कर्ज ले चुके किसान अब दाने-दाने को मोहताज होने की स्थिति में हैं।

रात-भर खेतों में पहरा दे रहे किसान

फसल की तबाही के बाद अब किसानों की सारी उम्मीदें मक्का की फसल पर टिकी हैं। इसे बचाने के लिए किसान दिन-रात एक कर रहे हैं:

जागकर गुजार रहे रातें: गांव के किसान रामवीर, नरेंद्र, सोनू, दिनेश, मनोज और ओमवीर ने बताया कि वे रात के समय भी खेतों में ही रहकर मक्का की रखवाली कर रहे हैं।

पशुओं से बचाव की चुनौती: बेसहारा पशुओं और नीलगायों से फसल को बचाने के लिए किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है, क्योंकि अब उनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचा है।

मुआवजे की गुहार और प्रशासन से मांग

भारी चिंता में डूबे ग्रामीण क्षेत्र के किसानों ने शासन और प्रशासन से मदद की अपील की है।

सर्वे और मुआवजा: बारिश से हुए आलू और गेहूं के नुकसान का उचित आंकलन कर जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।

सुरक्षा और सहायता: प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को विशेष आर्थिक पैकेज और बीज-खाद पर सब्सिडी प्रदान की जाए।

ग्रामीणों की नजरें अब मक्का पर

कन्हेरा सहित आसपास के इलाकों में इस समय मायूसी का माहौल है। किसानों का कहना है कि यदि मक्का की फसल अच्छी हो जाती है, तो उनके जीवन की गाड़ी फिर से पटरी पर लौट सकती है। प्रशासन द्वारा उचित सहायता न मिलने की स्थिति में किसानों के सामने भविष्य को लेकर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

 

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