संसद में गूंजी भोजपुरी की गूँज: सांसद जगदंबिका पाल ने संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की उठाई माँग

नई दिल्ली

सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने मंगलवार को संसद में जनभावनाओं से जुड़े दो अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाया। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने मंगलवार को संसद में जनभावनाओं से जुड़े दो अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने नियम 377 के तहत भोजपुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने और आकांक्षी जिलों में विकास कार्यों की समीक्षा को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।

भोजपुरी को मिले संवैधानिक दर्जा

सांसद पाल ने सदन को अवगत कराया कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में लगभग 6 करोड़ लोग भोजपुरी को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के अलावा मॉरीशस, फिजी और सूरीनाम जैसे देशों में भी इस भाषा की सशक्त उपस्थिति है। उन्होंने पुरजोर माँग की कि इतनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर करोड़ों भाषियों की वर्षों पुरानी मुराद पूरी की जाए।

रुर्बन मिशन और आकांक्षी जिलों पर सवाल

दूसरे महत्वपूर्ण विषय के रूप में उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन के अंतर्गत अनुपूरक प्रश्न पूछा। श्री पाल ने सरकार से आकांक्षी जिलों में रुर्बन क्लस्टरों के चयन के मानदंडों पर स्पष्टता माँगी। उन्होंने जानना चाहा कि क्या इन क्लस्टरों के माध्यम से रोजगार और बुनियादी सेवाओं में कोई वास्तविक सुधार हुआ है? उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यदि परिणाम अपेक्षित नहीं हैं, तो समावेशी विकास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

 

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