सिद्धार्थनगर: लेखपालों को अब पंचायत भवनों में मिलेगा अपना ‘दफ्तर’, ग्रामीण स्तर पर राजस्व व्यवस्था होगी मजबूत

सिद्धार्थनगर

उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप अब ग्रामीणों को खतौनी, दाखिल-खारिज और आय-जाति जैसे प्रमाण पत्रों के लिए लेखपालों के पीछे तहसीलों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप अब ग्रामीणों को खतौनी, दाखिल-खारिज और आय-जाति जैसे प्रमाण पत्रों के लिए लेखपालों के पीछे तहसीलों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सिद्धार्थनगर जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 तक प्रत्येक राजस्व लेखपाल के लिए उनके हल्के के पंचायत भवन परिसर में एक विशेष कक्ष निर्माण की योजना पर जिला प्रशासन ने काम शुरू कर दिया है।

राजस्व परिषद ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश के निर्देश मिलने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। शासन ने दो प्रमुख बिंदुओं पर जिले से रिपोर्ट मांगी है।भूमि की उपलब्धता: क्या पंचायत भवन परिसरों में लेखपाल कक्ष निर्माण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है? इसके लिए सर्वेक्षण की स्थिति क्या है?

यदि ग्राम पंचायत और लेखपाल हल्के की सीमाएं अलग-अलग हैं, तो लेखपाल का मुख्यालय कहाँ और किस आधार पर तय किया जाएगा?

ग्रामीणों की बढ़ेगी सहूलियत

वर्तमान में लेखपालों का कोई निश्चित बैठने का स्थान न होने के कारण ग्रामीणों को उन्हें ढूँढने में काफी परेशानी होती थी। पंचायत भवन में स्थायी कक्ष बनने से:

दाखिल-खारिज और खतौनी से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी।

प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए ग्रामीणों को लेखपाल के निजी ठिकानों या तहसील नहीं जाना पड़ेगा।

प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण स्तर पर ही राजस्व समस्याओं का समाधान हो सकेगा।

गूगल शीट के माध्यम से शासन को जाएगी रिपोर्ट

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इन सभी बिंदुओं पर डेटा एकत्रित कर गूगल शीट के माध्यम से शासन को भेजा जा रहा है। इसी रिपोर्ट के आधार पर बजट का आवंटन और निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिन हल्कों में एक से अधिक ग्राम पंचायतें आती हैं, वहाँ मुख्यालय के चयन पर विचार-विमर्श चल रहा है।

अधिकारियों का मत जिला प्रशासन इस पहल को ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहा है। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी सेवाओं की पहुँच सीधे ग्रामीणों तक सुनिश्चित होगी।

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