सिद्धार्थनगर: डीएम की स्वास्थ्य विभाग को कड़ी फटकार, बोले- “घर पर डिलीवरी व्यवस्था की विफलता, अब बर्दाश्त नहीं”

सिद्धार्थनगर

आयुष्मान कार्ड और टीकाकरण में लापरवाही पर एमओआईसी की जवाबदेही तय; फील्ड से गायब कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति (DHS) की बैठक में स्वास्थ्य विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली पर जमकर क्लास ली। डीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का मतलब मासूमों और माताओं की जान से खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

“घर पर प्रसव हुआ तो नपेंगे चिकित्सा प्रभारी”

बैठक में घर पर होने वाली डिलीवरी के आंकड़ों पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने इसे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता करार दिया। उन्होंने सख्त निर्देश दिए की अब जिले में किसी भी स्थिति में घर पर प्रसव नहीं होना चाहिए।

यदि किसी क्षेत्र में ऐसा मामला सामने आता है, तो संबंधित MOIC (चिकित्सा अधिकारी प्रभारी) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा और उन पर कार्रवाई होगी।संस्थागत प्रसव को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

आयुष्मान भारत योजना की धीमी प्रगति पर डीएम ने उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पात्र परिवार अभी भी योजना से बाहर हैं।

मैदानी जांच के निर्देश: डीएम ने अधिकारियों को दफ्तर से निकलकर क्षेत्र में आयुष्मान केंद्रों के संचालन की वास्तविक स्थिति जांचने को कहा।

कड़ी चेतावनी: “अगर गरीबों के मुफ्त इलाज की योजना केवल फाइलों तक सीमित रही, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

लापरवाह एएनएम और आशा बहुओं पर गिरेगी गाज

वीएचएनडी (VHND) दिवस, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा के दौरान कई खामियां मिलीं।

डेटा फीडिंग में खेल: टीकाकरण के डेटा में गलत मोबाइल नंबर और अधूरी फीडिंग को डीएम ने गंभीर चूक बताया।

निष्क्रिय कर्मचारी: फील्ड में काम न करने वाली एएनएम, आशा और सीएचओ (CHO) की पहचान कर उन्हें तत्काल नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

वार रूम और टेलीमेडिसिन सेवा पर सवाल

जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग की तकनीकी और आपातकालीन सेवाओं की भी पोल खोली:

NBSU (नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाई): इसके 24 घंटे सक्रिय न रहने पर नाराजगी जताई।

रेफरल सिस्टम: इमरजेंसी रेफरल रजिस्टर की अनुपलब्धता और वार रूम की कमजोर मॉनिटरिंग पर फटकार लगाई।

ई-संजीवनी: टेलीमेडिसिन सेवा के सीमित उपयोग को सुधारने और मरीजों को घर बैठे परामर्श का लाभ दिलाने पर जोर दिया।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब उनका लाभ धरातल पर मरीजों को मिले। उन्होंने सभी प्रभारियों को अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार लाने की हिदायत दी।

 

 Voice Of News 24