
ब्यूरो रिपोर्ट

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘समुद्र उत्कर्ष’ कार्यक्रम में भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत किया।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘समुद्र उत्कर्ष’ कार्यक्रम में भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना के लिए 262 विभिन्न प्रोजेक्ट डिजाइन एवं विकास परियोजनाएं उन्नत चरणों में पहुंच चुकी हैं, और ये सभी परियोजनाएं स्वदेशी रूप से विकसित की गई हैं।
स्वदेशीकरण का बढ़ता कदम
‘समुद्र उत्कर्ष’ सेमिनार का उद्देश्य भारत की उभरती हुई जहाज निर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करना था, जहां नौसैनिक आधुनिकीकरण और समुद्री आत्मनिर्भरता पर विस्तृत चर्चा हुई।
100% स्वदेशी लक्ष्य: रक्षा मंत्री ने बताया कि कई भारतीय शिपयार्ड इस दशक के भीतर अपनी परियोजनाओं में 100 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री उपयोग करने की ओर अग्रसर हैं।
वैश्विक प्रभाव से बचाव: उन्होंने जोर दिया कि इससे भारत से निर्मित नौसैनिक प्लेटफॉर्म पर वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों का न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा, जो रणनीतिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रमाण: राजनाथ सिंह ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के सभी निर्माणाधीन जहाज भारतीय शिपयार्ड्स में ही तैयार हो रहे हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन का प्रत्यक्ष परिचायक है।
समुद्री विरासत और आधुनिक शिपयार्ड
रक्षा मंत्री ने भारत की समृद्ध समुद्री विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने समुद्रों को बाधा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक संवाद के सेतु के रूप में इस्तेमाल किया।
राजनाथ सिंह ने बताया कि आज भारतीय शिपयार्ड वैश्विक मानकों के अनुरूप उन्नत हो चुके हैं
आधुनिक सुविधाएं
भारतीय शिपयार्ड अब आधुनिक फैब्रिकेशन लाइन्स, उन्नत मैटेरियल-हैंडलिंग सिस्टम्स और ऑटोमेटेड डिजाइन टूल्स से लैस हैं।
प्रौद्योगिक
इनमें मॉडल टेस्टिंग सुविधाओं और डिजिटल शिपयार्ड तकनीकों का उपयोग हो रहा है, जो देश की जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत कर रहा है।
इथियोपिया का निष्क्रिय माना जाने वाला हेली गुब्बी ज्वालामुखी रविवार को लगभग 12 हजार साल बाद अचानक फट गया। इस भीषण विस्फोट से निकलने वाली राख और सल्फर डाइऑक्साइड गैस का गुबार करीब 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। pic.twitter.com/fou9SJHyIv
— Voice of News 24 (@VOfnews24) November 25, 2025







