दादी के निधन पर पोते की भावुक कर देने वाली कविता,”मेरी दादी,मेरी कहानी”

ब्यूरो रिपोर्ट 

हिम्मत, साहस, धैर्य और संयम का भण्डार दिया है, एक दादी ही है जो असली प्यार और स्नेह से हमें संवार दिया है।

मुझे जन्म दे दी मेरी मां, ये मेरे ऊपर उसका अहसान है, लेकिन दादी ने जो अपने गोद में पनाह दिया ये मेरे लिए दुनिया की सबसे कीमती सामान है।

मेरे जन्म को लेकर मेरी दादी को उत्साह ज्यादा था, दादी के खाने-पीने की हर चीज में मेरा भी हिस्सा आधा था।

जैसे-जैसे बड़ा हुआ तो हमें भी दादी के प्यार की अहमियत समझ आई, मेरे गांव में उन्होंने हमें अपने पोते के रूप में पहचान दिलाई

आज भी ज्यादातर लोग मुझे मेरी दादी की पहचान से जानते हैं, दादी के एकमात्र नाम से ही लोग मुझे ज्यादा मानते हैं।

मै बड़े होता गया तो मेरी नटखटी आदतें भी शुरू हो गई,घर वालों को मेरी ये आदतें भले ही नहीं पसंद आतीं लेकिन मेरी दादी मेरे इन आदतों से कभी नहीं घबराईं।

जब कभी मेरी तबियत बिगड़ती तो डॉक्टर से पहले मेरी दादी अपनी जादुई हाथों से उपचार शुरू कर देती, बाद में दवा तो खाता लेकिन बिमारी खत्म होने का अहसास दवा से कम,दादी के दुआओं में विश्वास अधिक होती।

जब दादी का अंतिम दिन आया था, मैं सुबह काॅलेज जाते वक्त बुलाया था।
दादी बोल न सकी तो हाथ उठाईं थीं, इशारों से अपने होने का अहसास दिलाईं थीं।

मैं क्लास में जब बैठा था तो मेरे लिए दुखद समाचार आया,मेरे प्रधानाध्यापक ने दादी के न होने का अहसास दिलाया।

मेरे घर आते-आते उन्होंने कहा ‘तुम्हारी दादी अब नहीं रहीं’,जाओ घर दादी बुजुर्ग हो गईं थीं, चिंता की कोई बात नहीं,हमने उनसे कहां कि सर मेरे लिए आज से दुखदाई कोई रात नहीं।

मैं काॅलेज से घर आया तो दादी कुछ बोल न सकीं, मैं लाख बुलाने का प्रयास किया लेकिन दादी नहीं हिली,मेरे आंखों से आंसू निकलता रहा, दादी का वो लाड़-प्यार याद आता रहा।

दादी कि यादों ने दिल में हलचल पैदा कर दी,न चाहते हुए भी मेरी गैरमौजूदगी में दम तोड़ दीं,
अंतिम क्षण मैं दादी को बुला नहीं पाया,यह बात मेरे हृदय को सबसे ज्यादा दहलाया।

दादी नाम का चांद अब दुःखों के बादलों की उन गहराइयों में छिप गया जिसका निकलना अब संभव नहीं है।
अब भगवान से मेरी यही प्रार्थना है कि मेरी दादी को अपने श्री चरणों में स्थान दें।

 

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