असख्ती! सरकारी अस्पतालों में अब बाहर की महंगी दवाएं नहीं लिख सकेंगे डॉक्टर, पकड़े जाने पर निलंबन

लखनऊ

सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर की महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों पर अब सख्त कार्रवाई होगी।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर की महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों पर अब सख्त कार्रवाई होगी। उत्तर प्रदेश शासन ने यह कड़ा निर्देश जारी किया है, जिसके तहत यदि किसी चिकित्सक ने सरकारी अस्पताल के पर्चे पर या अलग सादी पर्ची पर बाहर की दवा लिखी और उसकी शिकायत मिली तो उसे निलंबित किया जाएगा।

सीएमओ भी होंगे जिम्मेदार

यह फैसला उन गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए लिया गया है, जिनका बजट 15 दिन की दवा 2 से 3 हजार रुपये में खरीदने से बिगड़ जाता है।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने चेतावनी दी है कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले दोषी डॉक्टर पर तो कार्रवाई होगी ही, साथ ही अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

उपलब्ध दवाओं को ही लिखने का निर्देश

सरकारी अस्पतालों में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन द्वारा भेजी जाने वाली 200 से अधिक दवाएं उपलब्ध रहती हैं। इसके अलावा, अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र भी हैं। डॉक्टरों को स्पष्ट रूप से आदेश दिया गया है कि वे केवल सरकारी स्टॉक में मौजूद और जेनेरिक दवाएं ही लिखें।

ओपीडी से गायब रहने वाले डॉक्टर भी चिह्नित

इसके साथ ही, शासन ने अस्पताल के समय ओपीडी कक्ष से गायब रहने वाले डॉक्टरों को भी चिह्नित करने का निर्देश दिया है। इसके लिए अस्पताल अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।

अपर मुख्य सचिव ने चेतावनी दी है कि 15 नवंबर के बाद शासन स्तर की टीमें अस्पतालों का अचानक निरीक्षण करेंगी। अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को सुबह से दोपहर 2 बजे तक तीन बार पूरे परिसर का राउंड लेना होगा।

 

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